जबलपुर: जबलपुर का नया मास्टर प्लान लागू करने में हो रही देरी पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगलपीठ ने प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग व संचालक नगर तथा ग्राम निवेश से शपथ पत्र पर जवाब मांगा है। अधिकारियों को बताना होगा कि 31 जनवरी, 2026 को नया मास्टर प्लान लागू करने की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई और मास्टर प्लान कब तक प्रकाशित किया जाएगा। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
मामले में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से डा. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि जबलपुर का मास्टर प्लान वर्ष 2021 में समाप्त हो चुका है, लेकिन अब तक नया मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया। वर्ष 2014 में जबलपुर शहर की सीमा में 62 नए गांव शामिल किए गए थे। इन क्षेत्रों के लिए भी नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने से नागरिकों को परेशानी हो रही है। याचिका में कहा गया कि इससे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं और लोग अपने निजी मकान के निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों को लेकर भी परेशान हैं।
25 फरवरी को पेश की थी अनुपालन रिपोर्ट –
पूर्व में हाईकोर्ट ने शासन को मास्टर प्लान की प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके पालन में शासन की ओर से 25 फरवरी 2025 को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि अनुपालन रिपोर्ट की कंडिका 23 में मास्टर प्लान शीघ्र लागू किए जाने की बात कही गई थी।
31 जनवरी के पत्र के बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई –
अधिवक्ता उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि 31 जनवरी 2026 को ज्वाइंट डायरेक्टर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, जबलपुर ने पत्र जारी कर बताया था कि मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार हो चुका है और उसे शासन की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इसके बाद भी करीब आठ माह बीत चुके हैं, लेकिन मास्टर प्लान के प्रकाशन और लागू करने की दिशा में स्थिति स्पष्ट नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर मास्टर प्लान कब तक लागू किया जाएगा। कोर्ट ने प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा संचालक नगर तथा ग्राम निवेश को दो सप्ताह में शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं
