जहांगीराबाद विवाद के बाद SOP पर सवाल: पुलिस और वकीलों के मामलों में क्या हैं कानूनी नियम

भोपाल। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में गणेश विसर्जन के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर अधिवक्ता और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब जांच के दायरे में है। घटना के बाद बड़ी संख्या में वकीलों ने पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया। इसके बाद बुधवार को जिला अदालत के बाहर भी प्रदर्शन और चक्काजाम किया गया।

मामले में पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। अधिकारियों ने प्राथमिक जांच सात दिन के भीतर पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

विवाद को लेकर दोनों पक्षों की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। वहीं, आरक्षक हरि ओम वर्मा की शिकायत पर राकेश रावल के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, अभद्रता और मारपीट के आरोपों में केस दर्ज किया गया है।

वकील पक्ष का आरोप है कि राकेश रावल के साथ पुलिस थाने में मारपीट की गई और उन्हें चोटें आईं। दूसरी ओर, पुलिस की शिकायत में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित अभद्रता, मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने की बात कही गई है।

अब इस मामले में पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच विवाद के दौरान अपनाई जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया और SOP को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गिरफ्तारी, पूछताछ और पुलिस कार्रवाई के दौरान किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए, इस पर हमने पुलिस अधिकारियों और कानून विशेषज्ञों से चर्चा की।

फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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