नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के व्यापार और निवेश कानून केंद्र ( सीटीआईएल ) द्वारा यहां ” मत्स्य पालन सब्सिडी पर डब्ल्यूटीओ समझौता : कानूनी ढांचा और नीतिगत संभावनाएं ” विषय पर यहां एक वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें समझौते के अनुपालन का समर्थन किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा यहां बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि 21 सितंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून विशेषज्ञों, मत्स्य पालन विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने समझौते के लागू होने के एक वर्ष बाद इसके कार्यान्वयन के साथ-साथ अतिरिक्त क्षमता और अत्यधिक मत्स्य पालन से संबंधित अतिरिक्त नियमों पर चल रही वार्ताओं पर चर्चा में भाग लिया।
यह समझौता 2022 में डब्ल्यूटीओ के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाया गया था। यह समझौता कुछ हानिकारक मत्स्य पालन सब्सिडी पर नियम निर्धारित करता है, जिनमें अवैध, गैर-सूचित और अनियमित (आईयूयू) मत्स्यन से जुड़ी सब्सिडी, पुनर्निर्माण की निर्दिष्ट शर्तों के अधीन अत्यधिक दोहन किए गए मत्स्य भंडार के लिए दी जाने वाली सब्सिडी तथा अनियमित उच्च समुद्र क्षेत्रों में मत्स्यन से संबंधित सब्सिडी शामिल हैं।
वेबिनार में मत्स्य पालन संबंधी विश्वसनीय आंकड़ों, सुदृढ़ निगरानी और रिपोर्टिंग प्रणालियों, संस्थागत समन्वय और एएफएस के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त तकनीकी क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में विकासशील और अल्पविकसित सदस्य देशों के लिए निरंतर क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई, जिसमें उपलब्ध डब्ल्यूटीओ तंत्रों के माध्यम से सहायता प्रदान करना भी शामिल था।
चर्चा में शामिल विशेषज्ञों में जिनेवा स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) में व्यापार एवं सतत विकास की निदेशक एलिस टिपिंग; आईआईएसडी, जिनेवा के वरिष्ठ नीति सलाहकार ट्रिस्टन इर्शलिंगर; डब्ल्यूटीओ अध्ययन केंद्र (सीडब्ल्यूटीओएस) के पूर्व प्रोफेसर प्रो. मुकेश भटनागर; तथा लघु पैमाने के मत्स्य पालन सलाहकार सेबेस्टियन मैथ्यू शामिल थे।
सत्र का संचालन सीटीआईएल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष और सीडब्ल्यूटीओएस के प्रभारी प्रमुख प्रोफेसर जेम्स जे. नेदुमपारा ने किया। सीटीआईएल की कानूनी सलाहकार प्रियांशा हाजेला ने उद्घाटन भाषण दिया।
