नयी दिल्ली, 23 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने कानूनी, पारदर्शी और बाल-केंद्रित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के बारे में जागरुकता बढ़ाने और अवैध दत्तक ग्रहण प्रथाओं से जुड़े जोखिमों और परिणामों को उजागर करने के लिए मणिपुर के इंफाल में बुधवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया।
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में समाज कल्याण विभाग, मणिपुर सरकार और मणिपुर राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (एसएआरए) के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार कार्यशाला में ‘कानूनी दत्तक ग्रहण, सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य, अवैध दत्तक ग्रहण को रोकें’ विषय के तहत उत्तर ए.ओ.सी., इंफाल, मणिपुर में एक दत्तक ग्रहण कार्यशाला में कानूनी, पारदर्शी और बाल-केंद्रित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के बारे में जागरुकता को मजबूत करने और अवैध दत्तक ग्रहण प्रथाओं से जुड़े जोखिमों और परिणामों को उजागर करने के लिए लगभग 150 प्रतिभागियों को एक साथ लाया गया।
कार्यशाला में मणिपुर के समाज कल्याण निदेशक शेख अब्दुल हकीम, अपर पुलिस अधीक्षक के. सुंदरबाला, अपर पुलिस अधीक्षक (आईयूसीएडब्ल्यू), इंफाल पश्चिम, श्रीमती रूपांशी पांडे और कई वरिष्ठ अधिकारी एवं हितधारक शामिल हुए। इसमें समाज कल्याण विभाग, सीडब्ल्यूसी, डीसीपीयू, एसएए, सीसीआई, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग, न्यायपालिका, कानूनी सेवा प्राधिकरण, अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
श्री हकीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा समन्वित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि बच्चों को अनियमित और अवैध दत्तक ग्रहण की व्यवस्था से बचाया जाये। सीएआरए की सहायक निदेशक रूपांशी पांडे ने हर स्तर पर सतर्कता और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा, ” अवैध दत्तक ग्रहण को रोकने के लिए हर स्तर पर सतर्कता और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। ”
कार्यशाला में अंतर-विभागीय समन्वय, समय पर सूचना साझा करने, जिम्मेदार रेफरल और वैधानिक अपनाने की प्रक्रिया के सख्त अनुपालन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपनी प्रमुख टिप्पणियां और सिफारिशें प्रस्तुत कीं।
कार्यशाला में बाल संरक्षण और दत्तक ग्रहण पारितंत्र में निरंतर जागरूकता, मजबूत समन्वय और समय पर हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिभागियों को उनकी संबंधित जिम्मेदारियों और यह सुनिश्चित करने के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाया गया कि देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे के साथ कानून के अनुसार और बच्चे के सर्वोत्तम हितों को सर्वोपरि विचार के रूप में सख्ती से निपटाया जाये।
कार्यशाला में सतर्कता को मजबूत करने, हितधारकों के बीच समन्वय में सुधार करने और मणिपुर में केवल कानूनी, सुरक्षित और बाल-केंद्रित दत्तक ग्रहण प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए एक नयी सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी।
