इंदौर: शहर में मंगलवार को कई अफसर कार के बजाय दोपहिया, साइकिल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दफ्तर पहुंचे. न्यायिक अधिकारियों ने भी निजी वाहन छोड़कर नो कार डे का संदेश दिया. खास बात यह रही कि इस अभियान की पहल करने वाले महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद देश में मौजूद नहीं थे. वे विदेश प्रवास पर हैं, लेकिन वहां भी उन्होंने निजी वाहन के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर अपने काम पूरे किए.
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आज के दिन तीन साल पहले नो कार डे अभियान शुरू किया था। उसी के तहत आज शहर में नो कार डे पर आज करीब 20 हजार से ज्यादा कारों का उपयोग नहीं किया गया. अधिकारियों से लेकर आम जनता एवं जनप्रतिनिधियों ने कार का उपयोग नहीं किया. इसका परिणाम यह रहा कि शहर के प्रदूषण में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. साथ ही शहर में करीब 30 प्रतिशत कारों का उपयोग कम किया गया. शहर में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान को जनता का समर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
अफसरों से लेकर न्यायिक अधिकारियों तक ने बदला सफर
नो कार डे में पर प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों ने भी भागीदारी की. अधिकारियों ने निजी कार छोड़कर दोपहिया, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुना. इसका मकसद सिर्फ एक दिन कार कम चलाना नहीं, बल्कि शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वैकल्पिक परिवहन साधनों के इस्तेमाल की आदत को बढ़ावा देना है.
महापौर विदेश में होने पर लेकिन अभियान से जुड़े
नो कार डे की सबसे अलग तस्वीर महापौर पुष्यमित्र भार्गव की रही. वे इस समय विदेश प्रवास पर हैं. ऐसे में इंदौर में अभियान का नेतृत्व वे नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने विदेश में रहते हुए भी निजी वाहन के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग किया. महापौर का संदेश खास इसलिए है , क्योंकि नो कार डे का उद्देश्य केवल सरकारी अधिकारियों को एक दिन कार छोड़ने तक सीमित रखना नहीं है. इसके पीछे आम जनता की निजी वाहन पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन को जिंदगी का हिस्सा बनाने पर जोर देना है.
अन्य दिनों की अपेक्षा आज नो कार डे पर निम्नात्मक तुलना
– 15 सितंबर बनाम 22 सितंबर
– समय- सुबह 8 से शाम 6 बजे
– निगरानीः 8 प्रमुख चौराहे
– 15 सितंबरः 68,630 कारें
– 22 सितंबरः 47,877 कारें
– अंतरः 20,753 कारें कम
– कमीः 30.24′
– पेट्रोल बचतः 501.21 लीटर
– डीजल बचतः 824.40 लीटर
