सीहोर। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा निपटान का काम एक बार फिर विवादों में आ गया है। सोमवार रात करीब 9 बजे जेबीआर कंपनी के कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने का हवाला देते हुए गीला कचरा लेकर पहुंची दो गाडिय़ों को गेट पर रोक दिया. कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है और कंपनी का करीब 74 लाख रुपए का भुगतान नगर पालिका में अटका हुआ है. मंगलवार सुबह भी कर्मचारियों ने कचरा वाहनों को अंदर जाने से रोक दिया. सूचना पर नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद वाहनों को ट्रेंचिंग ग्राउंड में प्रवेश दिया गया.
जानकारी के अनुसार शहर से रोजाना डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के बाद उसे ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाता है. यहां कचरे के निष्पादन का काम जेबीआर कंपनी को दिया गया है. कंपनी का नपा में करीब 74 लाख रुपए का भुगतान लंबित बताया जा रहा है. सीएमओ सुधीर कुमार सिंह के अनुसार कंपनी की ओर से पहले भुगतान के लिए जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं दिए गए थे. अब कंपनी ने नपा की मांग के अनुसार दस्तावेज जमा करा दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक बिलों से संबंधित दस्तावेज तीन बड़े कार्टून में आए हैं, जिनका सत्यापन करने में तीन से चार दिन लग सकते हैं. उसके बाद ही भुगतान जारी किया जाएगा. गौरतलब है कि जेबीआर कंपनी को काम मिलने से पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड पुराने कचरे के बड़े ढेर में तब्दील था. कंपनी ने करीब 1.74 लाख टन पुराने कचरे का निष्पादन कर ग्राउंड को काफी हद तक साफ कराया था. अब भुगतान और कर्मचारियों के वेतन को लेकर बने विवाद से यदि काम प्रभावित होता है तो ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पुराने हालात लौटने की आशंका बढ़ सकती है.
नपा अमले का कहना, विरोध करना है तो कंपनी से करें
सोमवार रात कर्मचारियों द्वारा कचरा वाहन रोके जाने की सूचना पर नगर पालिका का अमला मौके पर पहुंचा. पुलिस को भी बुलाया गया. कर्मचारियों को समझाया गया कि नगर पालिका ने उन्हें सीधे काम पर नहीं रखा है, इसलिए वेतन के लिए संबंधित ठेकेदार या कंपनी से बात करें. कचरा वाहनों को रोकना उचित नहीं है. समझाइश के बाद एक वाहन को अंदर जाने दिया गया, जबकि कुछ वाहनों को सड़क किनारे ही कचरा खाली करना पड़ा. इससे सड़क किनारे कचरे के ढेर लग गए.
प्लांट बंद, अब ग्राउंड पर डंप हो रहा कचरा
ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा निष्पादन का प्लांट फिलहाल बंद है. ऐसे में रोजाना आने वाले कचरे को ग्राउंड के एक हिस्से में डंप किया जा रहा ह. जगह-जगह कचरे के ढेर होने के कारण वाहनों को अंदर ले जाने में भी परेशानी हो रही है. विवाद के चलते कचरा निपटान का काम लंबे समय तक प्रभावित रहा तो ग्राउंड पर कचरे का दबाव तेजी से बढ़ सकता है.
35 वार्डों से रोजाना निकलता 30 टन से अधिक कचरा
शहर के 35 वार्डों से रोजाना 30 टन से अधिक कचरा निकलता है. करीब 25 हजार से अधिक मकानों से कचरा संग्रहण के लिए नगर पालिका 45 कचरा वाहनों के साथ जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग करती है. यानी एक सप्ताह तक कचरा निष्पादन प्रभावित रहा तो 200 टन से अधिक कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर जमा हो सकता है.
कचरा निष्पादन कंपनी का नहीं रोका भुगतान
मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुधीर कुमार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि कचरा निष्पादन का कार्य मेसर्स जेओआर कंपनी द्वारा किया जा रहा है. कंपनी की ओर से बिल के संबंध में आवश्यक समस्त औपचारिकताएं अभी पूर्ण नहीं की गई हैं. इसी कारण भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है. नगर पालिका द्वारा कंपनी के संचालक को 23 सितंबर 2026, बुधवार को कार्यालय में उपस्थित होकर बिल से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के लिए कहा गया है, ताकि नियमानुसार बिल का भुगतान किया जा सके. नगर पालिका ने स्पष्ट किया है कि कंपनी का भुगतान जानबूझकर नहीं रोका गया है.
