इंदौर: शहर में अमृत-2 योजना और नर्मदा जल आपूर्ति के दावों के बावजूद कई इलाकों में दूषित पानी और कम प्रेशर की गंभीर समस्या बनी हुई है. कई क्षेत्रों में नर्मदा लाइन में ड्रेनेज (सीवेज) का पानी मिलने से पानी बेहद गंदा और जहरीला आ रहा है, जिसमें फीकल कोलीफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं. नई पाइपलाइनें बिछने के बाद भी कई इलाकों में पानी का प्रेशर बहुत कम है, जबकि कई जगहों पर पाइपलाइन लीकेज के कारण पानी बर्बाद हो रहा है. दूषित पानी के सेवन से गंभीर बीमारियों का अंदेशा है.
नगर निगम द्वारा अमृत-2 योजना के तहत शहर में नर्मदा जल व्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अब भी अलग तस्वीर पेश कर रही है. ऐसी ही समस्या हरसिद्धि क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 59 में कलेक्टर कार्यालय के पीछे स्थित मोती तबेला क्षेत्र में सामने आई है. यहां कुछ वर्ष पहले नर्मदा की नई पाइपलाइन डाली गई थी, जिससे रहवासियों को उम्मीद थी कि इससे पानी की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन परेशानी अब भी बनी हुई है.
पानी सप्लाई के दौरान शुरुआत में कुछ देर तक दूषित पानी नलों में आता है, वहीं कई गलियों में पर्याप्त प्रेशर नहीं होने के कारण नर्मदा का पानी घरों तक नहीं पहुंच पाता. ऐसे में रहवासियों को मुख्य मार्ग या आसपास के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ता है. खास बात यह भी है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के बावजूद नगर निगम द्वारा रहवासियों से नर्मदा नल का प्रति महीना शुल्क भी वसूला जाता है. पानी की किल्लत के समय तंग गलियों के कारण निगम के टैंकर भी आसानी से नहीं पहुंच पाते. रहवासियों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है.
यह बोले रहवासी…
जितनी भी देर नर्मदा लाइन से पानी आता है पूरे समय दूषित पानी आता है, जो पीने योग्य नहीं होता. ऐसे में हमें मुख्य मार्ग जाकर पानी लाना पड़ता है.
– वनिता जाधव
लाइन में प्रेशर ही नहीं आता, बिल्कुल पाइप नीचे करके डब्बा लगाकर पानी भरते हैं और वह भी गंदा पानी आता है, किसको करें शिकायत, कोई सुनने वाला भी तो हो.
– सूरज प्रसाद
आसपास की गलियों में दूषित ही सही पर थोड़ा-बहुत पानी आता तो है. लेकिन हमारे क्षेत्र में पानी की सप्लाई बिल्कुल नहीं होती, जबकि हम 300 रुपए प्रति महीना नर्मदा बिल भी भरते हैं.
– माया चौहान
22 लाख लीटर की एक टंकी स्वीकृत हो चुकी है, समस्या शीघ्र हल हो जाएगी
दूषित पानी और तिलक के निपटान के हम पूरे प्रयास कर रहे हैं. मप्र खादी विभाग की भूमि पर 22 लाख लीटर एक टंकी स्वीकृत हुई है, जल्दी पानी को लेकर समस्याएं खत्म होंगी.
– रूपाली धारकर, पार्षद
