नयी दिल्ली, 22 सितंबर (वार्ता) नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि देश के विमानन क्षेत्र केवल दो एयरलाइंस का दबदबा सही नहीं है और भविष्य की मांग को देखते हुए 100 विमानों वाली कम से कम पांच विमान सेवा कंपनियों की जरूरत है।
देश के छोटे हवाई अड्डों को विमानन नेटवर्क से जोड़ने के लिए शुरू की गई क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़े देश का आम नागरिक ‘उड़ान-2’ के तहत 21 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद श्री नायडू ने कहा कि पिछले 12 साल में ‘उड़ान’ के तहत 95 नये हवाई अड्डे, 17 हेलीपोर्ट और दो वाटर एयरोड्रम बने हैं। अगले 10 साल में ‘उड़ान-2’ के तहत 100 नये हवाई अड्डे बनाने की योजना है। उन्होंने कहा, “एक बड़ी चुनौती यह है कि इन मार्गों पर परिचालन के लिए देश में विमानों की उपलब्ध संख्या अपर्याप्त है।” उन्होंने राज्यों से विमान सेवा कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की अपील की। दूसरी बड़ी चुनौती के रूप में उन्होंने नई विमान सेवा कंपनियां बनाने की वकालत की और राज्यों से क्षेत्रीय एयरलाइंस को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ दो विमान सेवा कंपनियों का दबदबा अच्छा नहीं है।
उनका इशारा इंडिगो और एयर इंडिया की ओर था जिनकी यात्रियों की संख्या के हिसाब से संयुक्त बाजार हिस्सेदारी 90 प्रतिशत के करीब है। इसमें अकेले इंडिगो की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत से अधिक है।
बाद में मीडिया से बात करते हुए श्री नायडू ने कहा कि देश में 100 या इससे भी अधिक विमानों वाली कम से कम पांच विमान सेवा कंपनियों की जरूरत है। अपने वक्तव्य के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से विमानन के अपने मॉडल तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य हेलीकॉप्टर सेवा को बढ़ावा दे सकते हैं, कुछ राज्य अपने हवाई अड्डे को कार्गों हब से तौर पर विकसित कर सकते हैं, तो हवाई अड्डों पर रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग सेवा के जरिये कमाई की जा सकती है।
कार्यक्रम में एयरोड्रम के लिए चैलेंज मोड की शुरुआत की गई और बोली लगाने के चरण के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दस्तावेज जारी किए गए। इस मौके पर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष विपिन कुमार और राज्यों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। जिन राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एमओयू हुए हैं उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, ओडिशा, तेलंगाना, त्रिपुरा, पुडुचेरी, दादर एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव, महाराष्ट्र, नगालैंड, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल हैं।
श्री नायडू ने कहा कि राज्यों के लिए एयरोड्रम बनाने के लिए चैलेंज मोड की शुरुआत का उद्देश्य मार्ग के आवंटन के बाद हवाई अड्डे के तैयार होने में लगने वाले समय में कमी लाना है। मौजूदा समय में यह हवाई अड्डे के तैयार होने में औसतन तीन साल का समय लगता है। इसे डेढ़ साल पर लाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि ‘उड़ान’ के पहले चरण में 1.68 करोड़ यात्रियों ने रियायती दर पर उपलब्ध ‘उड़ान’ सीटों पर यात्रा की। अगले 10 साल में योजना के दूसरे चरण में चार करोड़ यात्रियों का लक्ष्य है। साथ ही, इस योजना से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलेगा। वर्ष 2014 में विमानन उद्योग के कारण 30 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ था। अभी यह संख्या बढ़कर 77 लाख पर पहुंच गई है और वर्ष 2040 तक विमानन के कारण ढाई करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

