जापान में ‘डुजुआन’ तूफान की वजह से भारी बारिश , करीब 20 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के आदेश

टोक्यो, (वार्ता) जापान में ‘डुजुआन’ तूफान के असर से कई इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाएं, बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को ध्यान में रखते हुए सोमवार को करीब 20 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दिया गया।

जापान की मौसम एजेंसी जेएमए ने “जान को तुरंत खतरा” होने की चेतावनी दी थी, हालांकि बाद में कई अलर्ट का स्तर कम कर दिया गया। इज़ू द्वीप समूह के ओशिमा टाउन में सबसे ऊंचे स्तर की चेतावनी बनी रही, जबकि कई अन्य इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के लिए चौथे स्तर की चेतावनी जारी रही।

‘डुजुआन’ के साथ लगभग 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से लगातार हवाएं चलीं और हवा की गति 194 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गयी। करीब 50,000 से ज्यादा घरों की बिजली चली गयी, जबकि सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गयी और कुछ रेल सेवाएं रोक दी गयी।

यह इस साल का 25वां टाइफून था और यह जापान के प्रशांत तट के साथ-साथ आगे बढ़ा, जब देश ‘सिल्वर वीक’ की छुट्टियों का जश्न मना रहा था। तूफान ने बड़े कार्यक्रमों में भी बाधा डाली; ‘रॉक इन जापान’ फेस्टिवल में आज होने वाले कॉन्सर्ट रद्द कर दिये गये, जबकि ‘टोक्यो गेम शो’ ने भी अपना सोमवार का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भी तूफान के असर पर नज़र रखने के लिए अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा टाल दी। उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क जाना था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करनी थी।

योकोसुका शहर के अग्निशमन विभाग के मुताबिक 60 साल की एक महिला के बह जाने और भूस्खलन की चपेट में आकर घर के मलबे में दब जाने की आशंका है। पास के चिबा प्रांत में, 50 साल के एक व्यक्ति को भूस्खलन वाली जगह पर मलबा हटाते समय फंसने के बाद बचाया गया। वह भारी मशीनरी के साथ बांस के झुरमुट में गिर गया था और उसे अस्पताल ले जाया गया। कानागावा में अग्निशमन कर्मियों को एक व्यक्ति से सूचना मिली कि भूस्खलन से उसका घर दब गया है।

अल नीनो के दौर में प्रशांत महासागर में आये तूफानों की कड़ी में ‘डुजुआन’ सबसे नया तूफान है। समुद्र का तापमान बढ़ने से तूफ़ानों को ज़्यादा ऊर्जा मिल सकती है, जबकि गर्म हवा में ज़्यादा नमी हो सकती है, जिससे भारी बारिश हो सकती है।

माना जाता है कि जलवायु परिवर्तन से दुनिया भर में ट्रॉपिकल साइक्लोन (उष्णकटिबंधीय चक्रवात) की कुल संख्या नहीं बढ़ रही है और कुछ इलाकों में इनकी संख्या कम भी हो सकती है।

 

 

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