
विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
सिंगरौली भाजपा की जिला कार्यसमिति की पहली बैठक भले ही आखिरकार पूरी उपस्थिति के साथ हो गई, लेकिन बैठक से पहले हुए मान-मनौव्वल ने संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं को जरूर सामने ला दिया. जिला कार्यसमिति की घोषणा के चंद दिनों बाद बुलाई गई इस बैठक में शुरुआत में अपेक्षित संख्या में सदस्य नहीं पहुंचे. बताया जा रहा है कि कई वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ताओं को बैठक में आने के लिए काफी मान-मनौव्वल करना पड़ा. संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी दखल देना पड़ा, जिसके बाद सदस्य बैठक में पहुंचे और कुर्सियां खाली नहीं रहीं. संगठन के गलियारों में चर्चा है कि कार्यसमिति के गठन को लेकर कुछ पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. विशेष रूप से पूर्व मंडल अध्यक्षों और लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को अपेक्षित स्थान नहीं मिलने की बात कही जा रही है. वहीं यह भी चर्चा है कि जिला नेतृत्व के करीबी लोगों को अधिक तवज्जो मिली. हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मुद्दा सिर्फ एक बैठक का नहीं, बल्कि संगठन में संवाद और सम्मान का है. भाजपा जैसे कैडर आधारित संगठन में कार्यकर्ता यदि अपनी उपेक्षा महसूस करने लगें तो इसे समय रहते समझना जरूरी है. जिला अध्यक्ष के लिए भी यह आत्ममंथन का अवसर है कि संगठन में पसंद से ज्यादा अनुभव, सक्रियता और सामूहिकता को महत्व दिया जाए. क्योंकि राजनीति में आज की छोटी नाराजगी कल बड़ा सवाल बन सकती है. आने वाले नगरीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले यदि कार्यकर्ताओं के बीच दूरी बढ़ी तो उसका असर संगठन की जमीन पर दिखाई दे सकता है.
मौत के पहले भी जाग सकता था तंत्र
विंध्य के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल में लोग इस उम्मीद से आते है कि उन्हें इलाज के साथ एक नया जीवन मिलेगा पर सिस्टम की लापरवाही और बेलगाम व्यवस्था ने न जाने कितने जीवन खा लिए. अगर प्रसूता कल्पना की मौत न होती तो शायद शासन-प्रशासन की नींद न टूटती. विंध्य के चिकित्सा जगत में पहली बार ऐतिहासिक कार्यवाई हुई है. न्याय की आवाज के आगे झुकना पड़ा. ड्यूटी डाक्टर, नर्स का निलंबन और डीन के साथ अधीक्षक को एक झटके में हटाना पड़ा. उच्च स्तरीय जांच टीम बैठाई गई, कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिये, सुनवाई भी शुरू हो गई. जांच के बाद दोषियों पर कार्यवाई की गाज गिरनी बाकी है. लेकिन न्याय की आवाज के बीच तीन साल पूर्व जिस महिला डा. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त की गई थी उसे कार्यकारिणी समिति की बैठक में सेवा समाप्त का आदेश जारी करना पड़ा. सवाल यह उठता है कि तीन साल तक अपर मुख्य सचिव के आदेश को अमलीजामा क्यों नही पहनाया गया, आखिर कौन बचाता रहा? यह वही महिला डाक्टर है जिनकी ड्यूटी के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हुई. एक और महिला डाक्टर की वेतन वृद्धि रोकी गई है, यह कार्यवाई तीन साल पहले होनी थी. अगर जच्चा-बच्चा का मामला सामने न आता और ऐतिहासिक विरोध न होता तो शायद ही कोई कार्यवाई होती. पहली बार न्याय की आवाज के साथ सरकार ने इस तरह का एक्शन लिया है.
उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा
गुढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह की बड़ी बहू श्रीमती रश्मि राजा सिंह के राजनीति में आने और भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद राजनीतिक गलियारे में उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने की चर्चाएं तेज हो गई है. हाल ही में रीवा सांसद के हाथों सदस्यता ग्रहण की है. उनकी इस राजनीतिक एंट्री को आगामी विधानसभा चुनाव और नागेन्द्र सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है. हालाकि पार्टी या परिवार की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नही हुई है, लेकिन सदस्यता के बाद कई तरह की चर्चाएं चल रही है. माना जा रहा है कि विधायक जी ने आने वाले चुनाव को लेकर तैयारी अभी से शुरू कर दी है. भविष्य के समीकरणों और महिला नेतृत्व की दावेदारी से जोड़ कर देखा जा रहा है. अब सवाल यह है कि नजदीकी रिश्तेदार जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रणव प्रताप सिंह का क्या होगा, टिकट में पेंच फसेगा. हालाकि पिछले एक माह से प्रणव प्रताप क्षेत्र में एक बार फिर तेजी से सक्रिय हैं . बीच में सक्रियता थम गई थी.
