नयी दिल्ली, 21 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने सोमवार को घोषणा की कि उसने भारत में अपने डेटा सेंटर को एआई-रेडी क्षमताओं से लैस किया है। माइक्रोसॉफ्ट एआई इंफ्रास्ट्रक्चर समिट में कंपनी ने बताया कि हैदराबाद में उसका नया डेटा सेंटर एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए रणनीतिक हब के रूप में चिह्नित किया गया है। यह क्षेत्र में क्षमता विस्तार, सुदृढ़ता और एआई नवाचार के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष पुनीत चंडोक ने सम्मेलन में घोषणा की कि भारत में माइक्रोसॉफ्ट के डेटा सेंटर रीजन अब एआई से लैस हैं। इनमें एआई-सक्षम हार्डवेयर, उच्च दक्षता वाले कूलिंग सिस्टम और उन्नत एआई वर्कलोड को होस्ट और रन करने के लिए आवश्यक प्लेटफॉर्म के आधार शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हैदराबाद में अब लाइव हो चुके इंडिया साउथ सेंट्रल डेटा सेंटर रीजन में सुदृढ़ तीन जोन वाला आर्किटेक्चर है। इसमें आगे विस्तार की संभावना भी छोड़ी गई है। इस क्षेत्र में एडिशनल एज्योर और एआई सेवाओं की कंपनी की योजना है। जैसे-जैसे समर्थित सेवाएं उपलब्ध होंगी, संगठन देश में पात्र संवेदनशील वर्कलोड को नियंत्रण के साथ शुरू कर सकेंगे। ये नियंत्रण ऐसे होंगे, जिन्हें उनकी सुरक्षा, कंप्लायंस और सरकारी नियमों का पालन करने के लिए तैयार किया गया है।
माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में 20.5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी का यह नवीनतम डेटा सेंटर रीजन उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह इन्वेस्टमेंट भारत के क्लाउड और एआई फ्यूचर के लिए ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदल रहा है। अडानी समूह, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसी प्रमुख कंपनियां और अवसंरचना क्षेत्र के कुछ अन्य संगठन इस नये रीजन के लिए पहले ही समझौता कर चुके हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि देश की महत्वाकांक्षा एआई में अग्रणी राष्ट्र बनने की है। ऐसे समय में जब सरकार इंडिया एआई मिशन को आगे बढ़ा रही है, इस तरह के निवेश देश की एआई क्षमता का विस्तार करते हैं, नवाचार को गति देते हैं और डेवलपर्स, उद्यमों तथा सार्वजनिक संस्थानों को भरोसे के साथ एआई बनाने और इस्तेमाल करने में सक्षम बनाते हैं।
श्री चंडोक ने कहा कि इंडिया साउथ सेंट्रल देश में माइक्रोसॉफ्ट का चौथा क्लाउड रीजन है, जिसे उन्नत एआई वर्कलोड के लिए तैयार किया गया है। यह एशिया तथा ग्लोबल साउथ के लिए एक रणनीतिक गढ़ है। प्रमुख भारतीय उद्यम पहले से इस पर काम कर रहे हैं। लेकिन केवल कंप्यूट किसी देश को एआई के लिए तैयार नहीं बनाता। इसके लिए क्षमता जरूरी है, ऐसी क्षमता जो सरकारी नियमों के अनुरूप, सुरक्षित और सतत हो और ऐसे रीजन में उपलब्ध हो जहां कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य है।

