
ग्वालियर। ओजस्विनी विचार मंच ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के विराट पुस्तक मेला के देवमंच पर “डिजिटल युग में किताबों की प्रासंगिकता” विषय पर परिसंवाद का आयोजन किया गया।परिसंवाद की प्रवर्तक श्रीमती नंदिता चतुर्वेदी के प्रश्नों पर विचार रखते हुए डॉ. शोभा भारद्वाज, डॉ. श्रद्धा सक्सेना, डॉ. सिल्की चौधरी, डॉ. मंदाकिनी शर्मा, डॉ. नीतू भारद्वाज, डॉ. मनीषा पाठक, डॉ. साधना पालीवाल एवं कु. स्तुति बुधौलिया ने कहा कि डिजिटल युग में किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है, केवल स्वरूप बदला है। वक्ताओं ने माना कि तकनीक और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं; त्वरित जानकारी के लिए ई-बुक उपयोगी हैं, लेकिन किताबें धैर्य, गंभीरता, सृजनात्मकता और ज्ञान की गहराई के लिए सर्वोत्तम हैं। बाल मस्तिष्क के विकास में भी डिजिटल माध्यम की तुलना में पुस्तकें अधिक सार्थक हैं।
कार्यक्रम की प्रस्तावना श्रीमती ऋतु नामधारी ने रखी तथा संचालन सुश्री रुचि श्रीवास्तव ने किया। श्रीमती बासंती आठले ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। आयोजन में अखिल विश्व गायत्री परिवार ग्वालियर के संयोजक श्री संजय गुप्ता एवं श्रीमती ज्योति गुप्ता का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में ओजस्विनी विचार मंच की बहनों, गायत्री परिवार के सदस्यों एवं नागरिकों की उपस्थिति रही। अंत में डॉ. कल्पना शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
