नागोया (जापान), जापान के नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) के मुकाबलों में भारत की स्टार खिलाड़ी सुचिका तरियाल ने देश के लिए ऐतिहासिक मेडल पक्का किया है। हालांकि, स्वर्ण पदक जीतने का उनका सपना एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले तकनीकी नियम के चलते अधूरा रह गया। सिंगापुर की खिलाड़ी हुई हून टीओ के खिलाफ हुआ सेमीफाइनल मुकाबला ओवरटाइम तक चला और अंततः मुकाबला ‘ड्रॉ’ पर समाप्त हुआ। इसके बाद जब भारतीय दल ने फैसले को चुनौती दी और 10 जजों की बेंच ने फुटेज की समीक्षा की, तो नियमों के तहत ड्रॉ की स्थिति में कम वजन वाले फाइटर को विजेता घोषित किए जाने के प्रावधान के कारण सुचिका को हार का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनका वजन अपनी प्रतिद्वंद्वी से 700 ग्राम अधिक था।
फैसले के खिलाफ भारत ने दर्ज कराया था कड़ा विरोध, 1,000 डॉलर की फीस देकर करवाई गई थी मुकाबले की री-चेकिंग
मैच के दौरान आए इस विवादास्पद फैसले से नाराज होकर भारतीय फेडरेशन ने तुरंत विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया। इसके लिए 1,000 डॉलर की नॉन-रिफंडेबल फीस जमा करके मुकाबले की गहन समीक्षा की मांग की गई थी। जजों ने वीडियो फुटेज देखने के बाद मैच को अधिकारिक तौर पर ‘ड्रॉ’ तो करार दिया, लेकिन वजन के फासले ने सुचिका से फाइनल खेलने का मौका छीन लिया। इसके बावजूद, 36 वर्षीय इस अनुभवी खिलाड़ी ने महाद्वीपीय मंच पर देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर एमएमए के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई, एशियन गेम्स में एमएमए की शुरुआत के साथ रचा गया नया इतिहास
सुचिका तरियाल की इस शानदार उपलब्धि पर देश भर से बधाइयों का तांता लगा हुआ है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उन्हें बधाई देते हुए लिखा कि यह एमएमए में भारत का पहला एशियाई खेल पदक है। गौरतलब है कि मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स उन छह नए खेलों में शामिल है, जिन्हें इस बार नागोया एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किया गया है। भले ही सुचिका स्वर्ण या रजत पदक से चूक गईं, लेकिन उनका यह ब्रॉन्ज मेडल भारतीय एमएमए जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

