सविता पूनिया भारत की सबसे अधिक मैच खेलने वाली महिला हॉकी खिलाड़ी बनीं

आइची-नागोया, (जापान) 21 सितंबर (वार्ता) गोलकीपर सविता पूनिया सोमवार को भारत की सबसे अधिक मैच खेलने वाली महिला हॉकी खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने भारत की पूर्व स्ट्राइकर वंदना कटारिया के 320 सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सविता पूनिया ने यह उपलब्धि जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में इंडोनेशिया के खिलाफ भारत के पूल बी मैच के दौरान हासिल की।

ओपन प्ले में शॉट रोकने की अपनी काबिलियत और पेनल्टी शूट-आउट में शानदार रिकॉर्ड के कारण हॉकी की दुनिया में ‘द वॉल ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर 36 वर्षीय सविता ने 2009 में अपना सीनियर अंतरराष्ट्रीय में पर्दापण किया था। तब से, वह तीन ओलंपिक, दो एशियन गेम्स कैंपेन, कॉमनवेल्थ गेम्स और कई एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग सीजन में लगातार खेलती रही हैं। मौजूदा कप्तान सलीमा टेटे के कप्तानी संभालने से पहले वह लंबे समय तक भारतीय महिला टीम की कप्तान भी रही थीं।

सविता ने फरवरी 2025 में एफआईएच प्रो लीग में नीदरलैंड के खिलाफ अपना 300वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। वह यह आंकड़ा पार करने वाली दूसरी भारतीय महिला और अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पीआर श्रीजेश के बाद देश की दूसरी गोलकीपर बनीं। उन्होंने रविवार को एशियन गेम्स 2026 के पहले मैच में उज्बेकस्तान के खिलाफ भारत की 19-0 की शानदार जीत के दौरान वंदना के 320 मैचों के रिकॉर्ड की बराबरी की और सोमवार को उसे पीछे छोड़ दिया। सविता ने कहा, “मैं सबसे पहले धन्यवाद कहना चाहती हूं – अपने परिवार, अपने कोच, अपनी टीम की साथियों और हर उस व्यक्ति का, जो तब से मेरे साथ खड़ा रहा है जब मैं एक छोटी लड़की थी और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर बचाना सीख रही थी।

सच कहूं तो, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुंचूंगी। जब मैंने शुरुआत की थी, तो मैं बस टीम में अपनी जगह बनाना चाहती थी और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सबसे ज़्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ी कहा जाएगा। यह रिकॉर्ड केवल मेरा नहीं है – यह उन सभी का है जिन्होंने मेरे साथ खेला है, और वंदना का भी, क्योंकि उन्होंने एक स्टैंडर्ड सेट किया और हम सभी को और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।” उन्होंने कहा, “अब मेरी सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि नई पीढ़ी इसे देखे और विश्वास करे कि उनके लिए भी यह मुमकिन है। मैं चाहती हूँ कि वे आगे बढ़ती रहें, मेहनत करती रहें और भारतीय हॉकी के लिए बड़े सपने देखती रहें। इस खेल ने मुझे सब कुछ दिया है, और जब तक मैं कर सकती हूँ, मैं इसके लिए अपना योगदान देती रहूंगी।”

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