माता-पिता की अनदेखी पर मानवाधिकार आयोग चिंतित, अध्यक्ष ने कहा- परिवारों तक पहुंच रहे मानव अधिकार के मामले

दतिया: मप्र मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह यादव ने परिवारों में कमजोर होते आपसी रिश्तों और मानव मूल्यों को चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे मामले भी मानव अधिकार आयोग तक पहुंच रहे हैं, जिन्हें पहले परिवार के बड़े-बुजुर्ग या समाज आपसी स्तर पर सुलझा लिया करते थे।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में माता-पिता शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं कि उन्होंने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उनका पालन-पोषण किया, लेकिन अब बच्चे उनकी देखभाल नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति दुखद है।
सर्किट हाउस पर लोगों से मिले
आयोग अध्यक्ष आज रविवार को ट्रेन से दतिया पहुंचे। सर्किट हाउस में उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और यादव समाज के लोगों से मुलाकात की। प्रेस से बातचीत में उन्होंने मानव अधिकारों के संरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज के सशक्तीकरण और समावेशी विकास के लिए मानव अधिकारों की रक्षा जरूरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनयापन के जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना हर नागरिक का अधिकार है। इसमें शासन और प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। जहां कहीं चूक होती है, वहां मानव अधिकार आयोग संज्ञान लेता है।
अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए शासन-प्रशासन के साथ समाज और मीडिया की जागरूकता भी जरूरी है। सभी को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जिसमें परिवार और समाज में आपसी समरसता बनी रहे।उन्होंने कहा कि परिवार के बड़े-बुजुर्ग संरक्षक की भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी देखभाल करना सभी की जिम्मेदारी है। नई पीढ़ी को मानसिक प्रदूषण से बचाने की जरूरत है।

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