नयी दिल्ली 19 सितंबर (वार्ता) बीजू जनता दल (बीजद) के राज्यसभा सांसद डॉ. संतृप्त मिश्रा ने कहा है कि केंद्र सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के मुद्दे पर लोगों को आधी-अधूरी जानकारी दे रही है। इसका असर कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा और बीजद इनकी हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी। डॉ. मिश्रा ने शनिवार को यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एमडीआर को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जाल में फंस गयी है। वह समझ नहीं पा रही है कि इसे एमएमडीआर कहें या एमडीआर। उन्होंने कहा कि एमडीआर के मामले में कयी नीतिगत और संस्थागत मुद्दे जुड़े हुए हैं।उन्होंने कहा कि यूपीआई फिनटेक और भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण और सफल नवाचार रहा है।
इसने डिजिटल जागरूकता फैलाने, डिजिटल पहुंच बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में योगदान दिया है। सरकार ने शुरू में देश और विदेशों में यूपीआई को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया। जब लोगों ने इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लिया, तब अचानक एमडीआर का ढांचा सामने आया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय ने 2025 में एमडीआर ढांचे को लेकर लगाई जा रही अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “सरकार को 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.04 प्रतिशत एमडीआर लगाने का विचार कहां से मिला? क्या किसी विकसित देश में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.04 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाना विकास का संकेत है? इस ‘जादुई संख्या’ के पीछे कौन सा आर्थिक विश्लेषण किया गया?” उन्होंने कहा कि एमडीआर का असर केवल व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि समय के साथ यह सभी को प्रभावित करेगा।
इस दौरान उन्होंने ओडिशा से भाजपा के सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि ओडिशा से भाजपा 20 सांसद हैं और सभी ने एमडीआर के मुद्दे पर भी चुप्पी साधे रखी, जैसा कि वे ओडिशा और आम लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अन्य मुद्दों पर भी करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले का छोटे व्यापारियों और कारोबारियों पर पड़ेगा इससे उनके कम लाभ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस फैसले से लोग डिजिटल भुगतान से दोबारा नकदी की ओर लौटने पर मजबूर हो सकते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से नकद लेनदेन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।सरकार को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और डिजिटल भुगतान तंत्र का पूरी स्पष्टता के साथ समर्थन करना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने सवाल किया कि वित्तपोषण के वैकल्पिक तरीके हो सकते हैं। क्या किसी वैकल्पिक स्रोत से धन जुटाने की संभावना तलाश की गई? सरकार को सभी हितधारकों की राय को ध्यान में रखना चाहिए था। उन्होंने कहा कि एमडीआर से सरकार को सालाना 15,000-16,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। उसे स्पष्ट करना चाहिए कि यह राशि कहां जाएगी और इसका वितरण किस प्रकार किया जाएगा। इस ढांचे को लागू करने से पहले हितधारकों के साथ और अधिक विचार-विमर्श तथा गहन समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बीजद छोटे कारोबारियों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

