रीवा:कमिश्नर कार्यालय सभागार में आयुर्वेद कालेज की स्वशासी कार्यकारिणी की बैठक गत दिवस आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने कहा कि आयुर्वेद उपचार पद्धति तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस प्राचीन पद्धति को उपचार में कई लोग वरीयता दे रहे हैं। आयुर्वेद महाविद्यालय में डॉक्टरों और नर्सिंग की ट्रेनिंग की गुणवत्ता में सुधार करें।
इस कालेज की ऐसी प्रतिष्ठा हो कि यहाँ से निकलने वाले डॉक्टरों और नर्सों को हर चिकित्सा संस्थान अपने यहाँ कार्य देने का प्रयास करे। कमिश्नर ने समिति की नियमित बैठक आयोजित न होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हर तीन महीने में समिति की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित करें। कालेज में नवाचार करके उसे उपचार में प्रभावी बनाएं। आयुर्वेद चिकित्सालय की भी व्यवस्था को बेहतर करें। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति तथा कालेज और अस्पताल में दी जाने वाली सुविधाओं का ठीक से प्रचार-प्रसार करें जिससे अधिक से अधिक रोगी इनका लाभ उठा सकें।
बैठक में आयुर्वेद कालेज के डीन तथा प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने कार्यकारिणी समिति के प्रस्ताव प्रस्तुत किए। उन्होंने कालेज की गतिविधियों की जानकारी दी। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित दो करोड़ 57 लाख 49 हजार रुपए के व्यय प्रस्तावों में वृद्धि करने, आयुर्वेद अस्पताल की ओपीडी पर्ची पाँच रुपए से 10 रुपए करने को मंजूरी दी गई। बैठक में यूजी पाठ्यक्रम की सीटें 75 से बढ़ाकर 100 करने तथा यूजी क्लास की फीस में 5 हजार तथा पीजी क्लास की फीस में 10 हजार रुपए की वृद्धि को मंजूरी दी गई। बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती सपना त्रिपाठी, संयुक्त संचालक आयुर्वेद डॉ. शिवराम साकेत, प्रोफेसर ओपी द्विवेदी, अधीक्षक डॉ. एसएम खुझे तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
