फेड रिजर्व के निर्णय पर रहेगी बाजार की नजर

मुंबई 16 मार्च (वार्ता) देश में इस वर्ष फरवरी में खुदरा महंगाई में नरमी आने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाने से व्यापार युद्ध छिड़ने की चिंता में हुई भारी बिकवाली से बीते सप्ताह 0.7 फीसदी तक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार की अगले सप्ताह फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निर्णय के साथ ही चीन के आर्थिक आंकड़ों पर नजर रहेगी।

बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 503.67 अंक अर्थात 0.7 प्रतिशत की गिरावट लेकर सप्ताहांत पर 73828.91 अंक पर आ गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 155.3 अंक यानी 0.7 प्रतिशत उतरकर 22397.20 अंक रह गया।

समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों के मुकाबले मझौली और छोटी कपंनियों के शेयरों में अधिक बिकवाली हुई। इससे मिडकैप 825.47 अंक अर्थात 2.07 प्रतिशत कमजोर रहकर सप्ताहांत पर 39062.82 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह स्मॉलकैप 1761.88 अंक यानी 3.9 प्रतिशत का गोता लगाकर 43844.98 अंक पर रहा।

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक व्यापार युद्ध के बढ़ते प्रभाव ने बाजार की धारणा पर गहरा असर डाला है, जिससे अनिश्चितता बढ़ी है और सूचकांक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू कारकों ने कुछ राहत प्रदान की है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने मुद्रास्फीति में नरमी और मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे के चलते सुधार के सकारात्मक संकेत दिखाए हैं। इस वर्ष फरवरी में खुदरा महंगाई अपेक्षा से अधिक घटी है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

इसके अलावा जनवरी में औद्योगिक उत्पादन अनुमान से बेहतर रहा, जिससे बाजार की धारणा को बल मिला और गिरावट पर अंकुश लगा। वित्त वर्ष 2026 में बढ़ा हुआ सरकारी खर्च और उपभोक्ता आय में वृद्धि इस सुधार को समर्थन प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताएं और अमेरिकी मंदी की आशंका घरेलू बाजार की गति को प्रभावित कर सकती हैं।

इसके बावजूद हाल के सुधारों के कारण मूल्यांकन में आई नरमी, कच्चे तेल की गिरती कीमतें, डॉलर इंडेक्स में नरमी और आगामी तिमाहियों में घरेलू आय में संभावित वृद्धि जैसे कारक अस्थिरता को सीमित कर सकते हैं और बाजार में स्थिरता लाने में सहायक हो सकते हैं।

अगले सप्ताह 18 और 19 मार्च को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओपेन मार्केट कमेटी की द्विमासिक मौद्रित नीति समीक्षा बैठक होने वाली है। बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने की व्यापक संभावना है। फेड अधिकारी किसी भी मौद्रिक नीति संबंधी कदम उठाने से पहले प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियां कैसे लागू होंगी और उनका अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि श्री ट्रंप के टैरिफ के कारण आर्थिक मंदी आती है तो फेड को संभावित रूप से रोजगार बाजार को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ सकती है।

वहीं, अगले सप्ताह चीन की खुदरा बिक्री और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े जारी होंगे, जो उसकी आर्थिक वृद्धि को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण देंगे। साथ ही निवेशक अमेरिकी खुदरा बिक्री और उत्पादन आंकड़ों पर भी कड़ी नजर बनाए रखेंगे।

 

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