नये ढांचे के तहत सर्किल कार्यालयों में सहायक पोस्टमास्टर जनरल (एपीएमजी) और सहायक निदेशकों सहित समूह अधिकारियों के पास एक समान प्रभार होंगे। यह व्यवस्था महानिदेशालय के ढांचे के अनुरूप होगी, जिससे समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और नीतियों के सुचारू क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। डाक मंडल कार्यालयों के लिए दो तरह के मॉडल तैयार किये गये हैं- ‘दो आईपी/एएसपी मॉडल’ और ‘तीन आईपी/एएसपी मॉडल’। ग्रामीण और छोटे मंडलों में दो अधिकारियों का मॉडल लागू होगा, जबकि शहरी, बड़े और लॉजिस्टिक्स-केंद्रित मंडलों में तीन अधिकारियों वाला मॉडल काम करेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनावश्यक अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती न की जाए।
लॉजिस्टिक्स क्षमता वाले मंडलों की पहचान करते समय मौजूदा व्यावसायिक जरूरतों को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके अतिरिक्त, अहम शाखाओं की निगरानी बेहतर करने के लिए आवश्यकतानुसार वरिष्ठ अधिकारियों को भी मंडल कार्यालयों में तैनात करने की अनुमति दी गयी है। रेलवे मेल सर्विस (आरएमएस) नेटवर्क को भी इस पुनर्गठन में शामिल किया गया है। आरएमएस मंडलों में मेल और पार्सल की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने और निरीक्षण को मजबूत करने के लिए इंस्पेक्टरों और सहायक अधीक्षकों की तैनाती का ढांचा तय किया गया है।
कम छंटाई कार्यालयों वाले छोटे आरएमएस मंडलों में आवश्यकतानुसार तीन से चार अधिकारी तैनात हो सकेंगे। क्षेत्रीय कार्यालय भी अब एक समान सांगठनिक ढांचा अपनायेंगे। क्षेत्र के प्रमुख अपनी परिचालन संबंधी जरूरतों के आधार पर कर्मचारियों की तैनाती में फैसला ले सकेंगे। इसके अलावा, प्रत्येक सर्किल सदस्य (परिचालन) के परामर्श से अपने लॉजिस्टिक्स ढांचे को अंतिम रूप देगा। डाक सचिव से मंजूरी मिलने के बाद उप महानिदेशक (स्थापना) दुष्यंत मुद्गल ने यह आदेश जारी किया है। उन्होंने सभी डाक सर्किलों के प्रमुखों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पुनर्गठन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

