नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सेवारत और सेवानिवृत्त केंद्र सरकार के कर्मचारियों के आश्रित उभयलिंगी बच्चे और भाई-बहन अब अपनी उम्र की परवाह किए बिना केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) और केंद्रीय सेवा (चिकित्सा उपस्थिति) नियम, 1944 के तहत चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि यह फ़ैसला ‘उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ के तहत लिया गया है। ये दिशानिर्देश एक कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से जारी किये गये हैं। हालंकि, इस छूट के लिए दो मुख्य शर्तें हैं।
उभयलिंगी बच्चे या भाई-बहन का, मंत्रालय द्वारा निर्धारित आर्थिक निर्भरता की सीमा के अनुसार, पूरी तरह से केंद्र सरकार के कर्मचारी पर निर्भर होना ज़रूरी है। साथ ही, उस व्यक्ति के पास ‘उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ के तहत ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी होना चाहिए। यह आदेश नौकरी कर रहे कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों, दोनों के आश्रित उभयलिंगी बच्चों और भाई-बहनों पर लागू होता है और इसमें सीजीएसएस के साथ-साथ सीएस (एमए) नियम, 1944 के तहत मिलने वाली मेडिकल सुविधाएं भी शामिल हैं।
मंत्रालय के ज्ञापन में आठ नवंबर, 2016 के उस आदेश का उल्लेख है जिसमें निर्भरता तय करने के लिए वित्तीय सीमा निर्धारित की गई थी। नवीनतम दिशानिर्देशों के साथ जुड़े 2016 के आदेश में आय की सीमा 9,000 रुपये प्रति माह तय की गई है, साथ ही 9,000 रुपये की बेसिक पेंशन पर महंगाई राहत भी शामिल है, जो विचार किए जाने की तारीख पर लागू होती है। सीएस(एमए) नियम, 1944 के तहत मेडिकल सुविधाओं के लिए परिवार के सदस्यों की पात्रता तय करने में भी निर्भरता का यही मानदंड लागू होता है। हालिया आदेश से इस श्रेणी के आश्रितों के लिए उम्र सीमा तो समाप्त हो गई है लेकिन आर्थिक रूप से आश्रित होने की शर्त या ज़िला मजिस्ट्रेट से प्रमाणपत्र लेने की ज़रूरत अभी भी बनी हुई है। यह ज्ञापन केन्द्र सरकार की अवर सचिव हेमलता सिंह द्वारा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से जारी किया गया है।

