बताओ कितने घोड़े बचे हैं, उनका स्वास्थ्य कैसा है..?

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले को संजीदगी से लिया। मामले में मंगलवार को सुनवाई दौरान याचिकाकर्ता की ओर से रिज्वाइंडर पेश कर आरोप लगाया गया कि पिछले माह कुछ और घोड़ों की मौत हुई है, जिसे छुपाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अनावेदक सचिन तिवारी को शपथ पत्र पर यह बताने कहा है कि वर्तमान में कितने घोड़े बचे हैं और उनका मानसिक व शारीरिक हेल्थ स्टेटस क्या है।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने यह भी बताने कहा है कि घोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को नियत की है।पिछली सुनवाई के दौरान कलेक्टर व घोड़ों के केयर टेकर की ओर से शपथ पत्र पर घोड़ों की मौत के कारण, उपचाररत घोड़े की मेडिकल रिपोर्ट व उसके उपचार और भोजन व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई। दावा किया गया है कि अभी तक 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है।

दरअसल, जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि हैदराबाद निवासी सुरेश पाल गुडू हार्स पावर लीग के सूत्रधार है। हैदराबाद रेस क्लब में दो घोड़ों की रेस कराकर उन्होने ट्रोपंग करेठस्ता नाम एप के माध्यम से फिलीपिंन में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग करते हुए सट्टा लगवाया। इस संबंध में फिलीपिंन सरकार ने केंद्र सरकार से शिकायत की थी। शिकायत के बाद उन्होंने इसे बंद कर दिया था। सुरेश पाल गुडू के पास 150 से अधिक घोड़े थे और उन्होंने चार माह पूर्व कर्मचारियों के वेतन देना बंद कर दिया था। भोजन नहीं मिलने के कारण लगभग 90 घोड़ों की मौत हो गई थी। साक्ष्य छिपाने के लिए घोड़ों को नियम विरुद्ध तरीके से जबलपुर लगाकर सचिन तिवारी के द्वारा पनागर के रैपुरा में रखा गया है। देखरेख तथा भोजन व उपचार नहीं मिलने के कारण घोड़ों की मौत हो रही है।

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