सिंगरौली : म.प्र. शासन की आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना में सिंगरौली जिले के देवसर अंचल में वित्तीय अनियमितता को नवभारत ने 16 सितम्बर को प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित किया, जहां कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया है।कलेक्टर के निर्देश पर समय-सीमा की समीक्षा लेते ही पशुपालन विभाग ने इंडियन बैंक देवसर को कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिवस में जवाब तलब किया है। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार पीड़ित हितग्राही की डेयरी इकाई के लिए इंडियन बैंक देवसर ने 30 दिसंबर 2021 को 3,40,688 रुपए का ऋण स्वीकृति पत्र जारी किया था।
इसे 12 जनवरी 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के मंच से सार्वजनिक रूप से प्रदान किया गया था। इस स्वीकृति के आधार पर शासन द्वारा 1,13,562 रुपए की सब्सिडी राशि 10 मार्च 2022 को बैंक को हस्तांतरित कर दी गई थी। इधर सब्सिडी राशि मिलने के बावजूद बैंक ने न तो हितग्राही को ऋण वितरित किया और न ही कोई आधिकारिक रिजेक्शन लेटर जारी किया। 3 साल तक राशि दबाने के बाद बैंक ने बिना विभाग को सूचित किए 23 जनवरी 2025 को पिछले दरवाजे से सब्सिडी वापस भेज दी जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। वहीं बैंक द्वारा सिविल खराब होने की दी जा रही दलील को पशुपालन विभाग ने खारिज कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि सिबिल की जांच ऋण स्वीकृति और सब्सिडी मांगने से पहले की जाती है, न कि सब्सिडी मिलने के 3 साल बाद दी जाती है।
सीएम हेल्पलाइन शिकायतों को लेकर गलत जवाब
पत्र में यह भी खुलासा हुआ है कि पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई सीएम हेल्पलाइन शिकायतों में बैंक द्वारा विभाग को अंधेरे में रखा गया और शिकायतों को जबरन फोर्स क्लोज करवाया गया। फिलहाल, इस रिपोर्ट की प्रतियां संचालक पशुपालन भोपाल जिला कलेक्टर सिंगरौली संयुक्त संचालक रीवा संभाग और एलडीएम को भेज दी गई हैं। बैंक अधिकारियों पर अब दंडात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
