चितरंगी :जिले में नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान चल रहा है, लेकिन बगदरा और नौडिहवा चौकी क्षेत्र में कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर सामने आ रही तस्वीरें अभियान की जमीनी निगरानी पर सवाल खड़े कर रही हैं।रीवा पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत और सिंगरौली पुलिस अधीक्षक सियाज केएम द्वारा नशे के विरुद्ध कार्रवाई के बावजूद इन क्षेत्रों में इसका विशेष असर दिखाई नहीं देने की चर्चा है। बगदरा चौकी क्षेत्र के कुलकवार, बगदरा, रेही, गोपला और करौंदिया सहित कई गांवों में देशी-विदेशी शराब की कथित पैकारी धड़ल्ले से चलने के आरोप हैं।
वहीं नौडिहवा चौकी क्षेत्र के लोहदा, क्योंटली, पड़री, नौडिहवा, हरमा, माची और बिछी समेत दर्जनों गांवों में भी अवैध शराब बिक्री की चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस कथित कारोबार का असर गांवों के युवाओं पर पड़ रहा है। नशे की उपलब्धता बढ़ने से युवा लगातार इसकी गिरफ्त में फंस रहे हैं। आलम यह है कि सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि पैकारी एवं अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए आबकारी के साथ-साथ पुलिस भी दिलचस्पी नही ले रही है। इसके पीछे प्रमुख कारण क्या है, इसे तो आबकारी अधिकारी के साथ-साथ चौकी प्रभारी ही बताएंगे, लेकिन खाकी वर्दी के सांठगांठ से युवा वर्ग नशे के गिरफ्त में आ चुका है और दिनों दिन इसका ग्राफ बढ़ता जा रहा है।
मिलावटी शराब का कारोबार भी जोरों पर
सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों पर मिलावटी शराब का कारोबार भी जोर पकड़ रहा है। आदिवासी बहुल कुछ गांवों में महुआ से तैयार कच्ची शराब की बिक्री की बात भी सामने आ रही है। इसके साथ ही उत्तरप्रदेश के रास्ते कोरेक्स की कथित सप्लाई पहुंचने की चर्चा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पुलिस को उन रास्तों की जानकारी है, जिनसे नशीली सामग्री पहुंचती है। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि पैकारी के लिए हरी झंडी किसने दे रखी है और अवैध कारोबारियों तक देशी-विदेशी शराब की सप्लाई कौन कर रहा है? पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत तथा संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
