पलक्कड़, 16 सितंबर (वार्ता) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पलक्कड़ ने रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया की निगरानी करने और उसे नियंत्रित करने के लिए एक बेहद उन्नत फ्लोरोसेंट कीमो सेंसर विकसित किया है।
यह सेंसर मुख्य रूप से हेपरिन एंटीकोआगुलंट (रक्त रोधी) दवा है जिसका इस्तेमाल गंभीर चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान बड़े पैमाने पर किया जाता है।
नए विकसित सेंसर कार्डियक सर्जरी, डायलिसिस, रक्त आधान और अन्य प्रक्रियाओं के दौरान हेपरिन की सही डोज़ सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं, जहाँ खून का थक्का जमने और बहुत ज़्यादा रक्तस्राव , दोनों को रोकने के लिए दवा का सही स्तर बनाए रखना ज़रूरी होता है।
यह शोध रसायन शास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. शनमुगराजू शंकरसेकरन और शोधकर्ता नौशिजा एम की देखरेख में किया गया है। यह तकनीक हेपरिन की निगरानी के पारंपरिक तरीकों की कुछ कमियों को दूर करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो खून का थक्का जमने के समय को मापने पर निर्भर करते हैं।
खास तौर पर डिज़ाइन किए गए सेंसर मॉलिक्यूल पीले-हरे रंग का फ्लोरोसेंट संकेत पैदा करते हैं, जिसकी तीव्रता हेपरिन की मौजूदगी में कम हो जाती है। फ्लोरोसेंस में इस बदलाव को मापकर, हेपरिन की मात्रा का पता अपेक्षाकृत सरल उपकरणों का उपयोग करके लगाया जा सकता है, जिससे यह तकनीक तेज़ी से नैदानिक निगरानी के लिए संभावित रूप से उपयुक्त हो जाती है।
डॉ. शनमुगराजू ने कहा कि यह तकनीक सरलता और उच्च सटीकता को जोड़ती है और इसमें क्लिनिकल उपयोग के लिए काफी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि यह क्षमता मौजूदा डायग्नोस्टिक तरीकों से जुड़ी कुछ चुनौतियों का समाधान करती है और सरल तथा भरोसेमंद हेपरिन निगरानी प्रणालियों के विकास को सुविधाजनक बना सकती है।
