
इंदौर: आज गणेश जी की स्थापना घर-घर में हो रही है. धार्मिक आस्था से लेकर व्यापार, शिक्षा, समाज, न्याय और पर्यावरण तक गणेश जी का स्वरूप अपने भीतर व्यापक संदेश समेटे हुए है. धर्म में हर शुभ कार्य का श्रीगणेश गणेश जी के स्मरण से होता है, वहीं व्यापारी उन्हें व्यापार की समृद्धि और शुभ-लाभ का प्रतीक मानते हैं. सामाजिक दृष्टि से गणेश जी विघ्नों को दूर कर व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और न्यायपूर्ण समाज की प्रेरणा देते हैं.
गणेश जी का प्रकृति से भी गहरा संबंध है. उनका स्वरूप हमें प्रकृति के संरक्षण और उसके नियमों के सम्मान का संदेश देता है. शिक्षा के क्षेत्र में वे बुद्धि, ज्ञान और विवेक के प्रतीक हैं तथा चारों वेदों के ज्ञाता माने जाते हैं। विघ्नहर्ता, रिद्धि-सिद्धि दायक और शुभ-लाभ के प्रतीक गणेश जी की स्थापना तभी सार्थक होगी, जब पूजा के साथ धर्म, न्याय, शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण को भी जीवन में उतारा जाए. यही गणेशोत्सव को सच्चे अर्थों में जनकल्याणकारी और प्रकृति-सम्मत बनाने का मार्ग है.
उनके गुणों को जीवन में उतारना जरूरी
गणेश जी केवल शुभ कार्यों के आरंभ के प्रतीक नहीं, बल्कि समाज को बुद्धि, विवेक, विनम्रता, धैर्य और एकता का संदेश देने वाले देवता हैं. उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनके परिवार में हर शुभ कार्य की शुरुआत गणेश वंदना से होती थी. रामायण, गीता और भागवत जैसे ग्रंथों के अध्ययन ने उनके जीवन में संस्कारों को मजबूत किया. डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने कहा कि गणेश उत्सव समाज को एकजुट करने और संकट के समय सामूहिक रूप से खड़े होने की प्रेरणा देता है. आज उत्सव में बढ़ते दिखावे और प्रतिस्पर्धा के बजाय हमें गणेश जी के आदर्शों को अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सच्ची आराधना तभी है, जब हम अपने आचरण से समाज में सद्भाव, सेवा और सहयोग की भावना बढ़ाएं.
– डॉ जनक पलटा मगिलिगन, सामाजिक कार्यकर्ता
गणेशोत्सव भारतीय न्यायशास्त्र और विधि के शासन का प्रतीक
गणेशोत्सव केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि न्याय, विवेक और विधि के शासन का प्राचीन प्रतीक भी है. गणेश जी के विशाल कान निष्पक्ष सुनवाई और सभी पक्षों को धैर्यपूर्वक सुनने का संदेश देते हैं, जबकि छोटा मुख अनावश्यक वाक्-जाल से बचने की सीख देता है. माता पार्वती के आदेश की रक्षा करते हुए गणेश जी ने भगवान शिव को भी रोका, जो ‘कानून सबसे ऊपर’ होने का संदेश है. मूषक वाहन समानता और कमजोर वर्ग के महत्व को दर्शाता है. महाभारत लेखन में एकदंत का त्याग कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के दस्तावेजीकरण का प्रतीक है. राठौर ने कहा कि न्याय बुद्धि, धैर्य, निष्पक्षता और मर्यादा पर आधारित होना चाहिए.
– अभिजीत सिंह राठौर, लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता, जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर,
शिक्षा में विवेक के साथ बुद्धि का उपयोग जरूरीॉ
गणेश जी विद्या और बुद्धि के देवता माने जाते हैं. उनके जीवन से विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और गुरु के प्रति श्रद्धा की प्रेरणा मिलती है. शिक्षा के क्षेत्र में बुद्धि का उपयोग यदि विवेक और सकारात्मक सोच के साथ किया जाए, तो विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है. यही बुद्धि उसे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक या कुशल प्रशासक बनने में सहायता करती है. उन्होंने कहा कि गणेश जी की बुद्धिमत्ता का उदाहरण उनकी माता-पिता की परिक्रमा की कथा से मिलता है. संसार की परिक्रमा करने के बजाय उन्होंने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें अपना संसार माना. यह प्रसंग विद्यार्थियों को परिस्थितियों को समझकर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा देता है. डॉ. गर्ग ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक का सही दिशा में उपयोग करना भी है.
– डॉ. एस.एल. गर्ग, शिक्षाविद्
गणेश आराधना आत्मबोध की शुरुआत भी
पूजा से शुरुआत, संस्कार से जीवन और साधना से आत्मबोध की ओर बढ़ना।
यही गणेश तत्व का आध्यात्मिक विस्तार है. भगवान गणेश को सामान्यतः प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में जाना जाता है, लेकिन अध्यात्म की दृष्टि से गणेश का स्वरूप इससे कहीं व्यापक है. गणेश अध्यात्म की पहली सीढ़ी हैं. वे कहते हैं गणेश मंगल के अधिष्ठाता और विघ्न-विनाशक हैं, इसलिए हर शुभ कार्य में उन्हें प्रथम पूज्य माना गया है.
भट्ट के मुताबिक गणेश जी का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संदेश माता-पिता के सम्मान और सेवा में छिपा है. शिव-पार्वती की परिक्रमा कर गणेश जी ने बताया कि माता-पिता में ही पूरा जगत समाया है. उनका कहना है कि माता-पिता की सेवा भी एक आध्यात्मिक साधना है. योग और साधना की दृष्टि से गणेश का संबंध मूलाधार चक्र से माना जाता है. वहीं इंदौर के खजराना गणेश, बड़ा गणपति सहित प्राचीन मंदिर शहर की गहरी गणेश परंपरा के प्रतीक हैं.
– विनीत भट्ट, खजराना गणेश मंदिर के पुजारी
गणेश स्थापना में छिपा उद्योगों की सफलता का मंत्र
गणेश स्थापना के अवसर पर एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष ने भगवान गणेश के स्वरूप को उद्योग और व्यापार प्रबंधन से जोड़ते हुए कहा कि गणेश जी ‘शुभ लाभ’ के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि व्यापार में लाभ तभी सार्थक है, जब वह श्रमिकों को उचित मेहनताना, सुरक्षित कार्यस्थल और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी के साथ अर्जित हो. गणेश जी के साथ छोटे चूहे से लेकर विभिन्न स्वरूपों का जुड़ाव टीम भावना और समावेशिता का संदेश देता है। उनका विशाल स्वरूप उद्योगों को बड़ी सोच, व्यापक दृष्टि और बड़े लक्ष्य रखने की प्रेरणा देता है. गणेश स्थापना इसी सकारात्मक सोच और सामाजिक सरोकार का प्रतीक है.
– योगेश मेहता, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री, मध्यप्रदेश
