
सिंगरौली । ब्लॉक मुख्यालय देवसर के अनुसूचित जाति सीनियर बालिका छात्रावास क्रमांक-2 में शुक्रवार को निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने अधिकारियों के सामने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। संभाग आयुक्त रीवा एवं कलेक्टर सिंगरौली शनिवार को छात्रावास के निरीक्षण पर पहुंचे थे। इस दौरान छात्राओं से संवाद करते हुए जब उनकी समस्याएं जानी गईं तो बालिकाओं ने भोजन, नाश्ता और छात्रावास संचालन को लेकर गंभीर शिकायतें सामने रखीं। छात्राओं का आरोप है कि जुलाई से नाश्ते के नाम पर केवल दो बिस्किट दिए जा रहे हैं। भोजन में रोटियां कभी जली तो कभी कच्ची मिलती हैं। इतना ही नहीं, छात्राओं को अपनी थालियां तक स्वयं धोनी पड़ती हैं। विरोध करने या शिकायत करने पर वार्डन द्वारा धमकाने का भी आरोप लगाया गया। छात्राओं की शिकायतें सुनकर छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर कमिश्नर ने अधीक्षिका को कड़ी फटकार लगाई। अधीक्षिका को नोटिस जारी करते हुए व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। निरीक्षण में सामने आई स्थिति ने छात्रावासों में प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि जिले के छात्रावासों में अभी एक्का-दुक्का का पोल खुला है। सूत्र बताते हैं कि इसी तरह कई छात्रावासों में भर्रेशाही मची हुई है।
सहायक आयुक्त की भूमिका पर सवाल
इधर यहां बताते चले कि पिछले महीने बैढ़न के अजा कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भी कलेक्टर से मुलाकात कर पानी, भोजन, नाश्ता और अधीक्षक के कथित दुर्व्यवहार को लेकर शिकायत की थी। कलेक्टर ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग को जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन करीब डेढ़़ महीने बाद भी जांच में क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इस संबंध में सहायक आयुक्त से कई बार संपर्क किए जाने के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि छात्रावासों की समस्याओं पर शिकायत के बाद कार्रवाई कागजों तक सीमित है या वास्तव में व्यवस्था बदलने की कोशिश हो रही है। देवसर छात्रावास में अधिकारियों के सामने छात्राओं द्वारा बताई गई स्थिति ने जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महीने भर शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस
चितरंगी तहसील के राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय बालक छात्रावास बर्दी में छात्रों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का मामला अब विभागीय कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर रहा है। शिकायत सामने आने के बाद जांच का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी अधीक्षक की कार्यप्रणाली की जांच शुरू होने या पूरी होने की कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इधर छात्रों ने भोजन व्यवस्था को लेकर सवाल करने पर अधीक्षक पर कथित तौर पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए उनकी वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकती है। वहीं छात्रों के अनुसार भोजन व्यवस्था को लेकर यह भी कहा गया कि पैसा नहीं आ रहा है और अपनी जेब से खर्च कर बच्चों को भोजन कराया जा रहा है।
