
पलेरा। मानवता को शर्मसार करने वाला मामला पलेरा जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम सैपुरा से सामने आया है। गांव में मुक्तिधाम की व्यवस्था नहीं होने के कारण 62 वर्षीय हल्काई अहिरवार का शुक्रवार सुबह बरसात के बीच तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी गांव में गुजार दी, उसे अंतिम विदाई भी सम्मानजनक तरीके से नसीब नहीं हो सकी।
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में अंतिम संस्कार के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शुक्रवार सुबह हल्काई अहिरवार की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे, लेकिन मुक्तिधाम की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण तिरपाल लगाकर बारिश से बचाव के बीच अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सामने आई तस्वीर ने गांव में मूलभूत सुविधाओं और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
एक साल से पंचायत के खाते में राशि, फिर भी नहीं बना मुक्तिधाम
सरपंच प्रतिनिधि रमेश लटोरिया ने बताया कि गांव में यह पुराना मुक्तिधाम है, जहां लगातार अंतिम संस्कार किए जाते हैं। मुक्तिधाम निर्माण के लिए करीब एक वर्ष पहले सांसद निधि से राशि स्वीकृत होकर पंचायत के खाते में आ चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
उनका आरोप है कि मुक्तिधाम के लिए निर्धारित भूमि पर दबंगों का कब्जा है और उनके द्वारा निर्माण नहीं होने दिया जा रहा है। इस संबंध में पंचायत की ओर से कई बार तहसीलदार और जनपद सीईओ को आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
कलेक्टर से निरीक्षण कर कार्रवाई की मांग
सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि पंचायत द्वारा लगातार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कलेक्टर से मौके का निरीक्षण कराकर मुक्तिधाम की भूमि को कब्जामुक्त कराने और जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में किसी की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत और मानवीय जरूरत के लिए भी यदि तिरपाल का सहारा लेना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और सैपुरा गांव को सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम की सुविधा मिल पाती है।
