
नयी दिल्ली, 11 सितंबर (वार्ता) केंद्र सरकार के मंत्रालय और विभाग दिव्यांग कर्मचारियों को निर्धारित सहायक उपकरणों की अनुमानित लागत का 80 प्रतिशत तक अग्रिम प्रदान कर सकते हैं। यह अग्रिम अधिकतम 10 लाख रुपये तक हो सकता है और यह सुविधा हर तीन वर्ष में एक बार दी जा सकेगी।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने निर्धारित सहायक उपकरणों की आवश्यकता वाले कर्मचारियों के लिए अग्रिम राशि के संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुरोध के जवाब में यह स्पष्टीकरण जारी किया।
विभाग ने कहा कि उसे सहायक उपकरणों के लिए अग्रिम भुगतान पर कोई आपत्ति नहीं है और इसे दिव्यांग कर्मचारियों के लिए समय पर उचित समायोजन सुनिश्चित करने हेतु एक सुविधाजनक उपाय माना है। कार्यालय ज्ञापन में कहा गया, “मंत्रालय और विभाग निर्धारित उपकरण की अनुमानित लागत का 80 प्रतिशत तक अग्रिम की राशि देने पर विचार कर सकते हैं।” यह अग्रिम राशि प्रत्येक तीन वर्ष में कुल 10 लाख रुपये की अधिकतम सीमा और विभाग के 22 सितंबर, 2025 के कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित अन्य शर्तों के अधीन होगी।
वर्ष 2025 के प्रावधानों के तहत, पात्र कर्मचारियों को सहायता एवं सहायक उपकरण या तो प्रतिपूर्ति के माध्यम से या विभाग द्वारा उपकरण खरीदकर उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जो हर तीन वर्ष में निर्धारित 10 लाख रुपये की सीमा के भीतर होंगे। इस स्पष्टीकरण के तहत सहायक उपकरणों की समय पर खरीद में मदद के लिए अग्रिम भुगतान का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 31 अगस्त को जारी अपने पत्र में कहा कि निर्धारित सहायक उपकरणों के लिए अग्रिम राशि का अनुरोध करने वाले अशोक अग्रवाल और रमा शंकर के मामलों पर विचार किया जा रहा है। इसके जवाब में, विभाग ने मंत्रालयों एवं विभागों को अग्रिम राशि भुगतान प्रणाली पर विचार करने की अनुमति दी, बशर्ते यह मौजूदा वित्तीय सीमा और तय शर्तों के दायरे में रहे। यह स्पष्ट है कि किसी भी अतिरिक्त अग्रिम राशि की वसूली या समायोजन लागू वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा। यह स्पष्टीकरण अवर सचिव अजय कुमार की ओर से सभी मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों को भेजा गया।
