
इंदौर. फर्जी दस्तावेज और गलत केवाईसी के जरिए एक्टिवेट कराई गई 33 सिम के जरिए देश के 17 राज्यों में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा हुआ है. क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन फास्ट-2.0 के तहत सिम साइबर अपराधियों तक पहुंचाने वाले सप्लायर को गिरफ्तार किया है. जांच में इन नंबरों का इस्तेमाल 17 राज्यों में दर्ज 55 साइबर अपराध की शिकायतों में सामने आया है.
क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान सिम नंबरों का मिलान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के डाटा से किया. इसमें मध्यप्रदेश के अलावा उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, तेलंगाना और कर्नाटक सहित 17 राज्यों की शिकायतों में इन नंबरों का इस्तेमाल मिला. पकड़ा गया आरोपी धर्मेंद्र फर्जी दस्तावेज और गलत केवाईसी के जरिए अलग अलग सिम एक्टिवेट कराता था. इसके बाद इन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था. इन नंबरों का इस्तेमाल यूपीआई फ्रॉड, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉलिंग, इंटरनेट बैंकिंग ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में किया.
आरोपी से पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही पुलिस
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर फर्जी केवाईसी उपलब्ध कराने वालों और सिम खरीदने वाले साइबर अपराधियों की जानकारी जुटा रही है. सिम से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके. मामले में एडिशनल डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने बताया कि फर्जी सिम साइबर अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण साधन बन रही हैं. ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई जारी है. आरोपी से पूछताछ कर सिम उपलब्ध कराने और उनका इस्तेमाल करने वाले अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है.
