उज्जैन। विकास और आस्था के बीच ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे शहर का ध्यान खींच लिया है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आए करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन चार दिनों में चार प्रयासों के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई।
दरअसल, कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी के तहत मंदिर के मुख्य ढांचे को हटाया जा चुका है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती है—प्राचीन प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह स्थानांतरित करना।
नगर निगम की टीम ने क्रेन और भारी मशीनरी की मदद से प्रतिमा को हटाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन ने अब जल्दबाजी के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
ताजा जानकारी के मुताबिक प्रतिमा के आधार और आसपास की जमीन की अत्याधुनिक स्कैनिंग कराई जाएगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को किस तकनीक से सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है।
इस बीच प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। कई लोग इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं।
वहीं विशेषज्ञों ने प्रतिमा की ऐतिहासिकता को लेकर भी वैज्ञानिक जांच की जरूरत बताई है। इसे प्राचीन बेसाल्ट पत्थर से निर्मित बताया जा रहा है, लेकिन इसकी वास्तविक उम्र की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
खास बात यह है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं। सड़क, यातायात और शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण भी शहर की इसी व्यापक तैयारी से जुड़ा अहम हिस्सा है। लेकिन प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी है—विकास का काम भी आगे बढ़ाना है और धार्मिक आस्था व ऐतिहासिक विरासत को भी सुरक्षित रखना है।
अब सवाल सिर्फ सड़क चौड़ीकरण का नहीं…सवाल यह है कि सिंहस्थ की तैयारियों के बीच विकास और आस्था के इस संतुलन का रास्ता कैसे निकलेगा? फिलहाल सबकी नजरें विशेषज्ञों की जांच और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
