नई दिल्ली, संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली ने दुनिया के पारंपरिक नक्शे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए एक नया ‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ नक्शा अपनाने के पक्ष में भारी मतदान किया है। टोगो द्वारा पेश किए गए और अफ्रीकी संघ के समर्थन वाले इस प्रस्ताव को फ्रांस और ब्रिटेन समेत 164 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। 16वीं सदी से चलन में रहे पुराने मर्केटर नक्शे पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वह अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे भूमध्य रेखा के पास के महाद्वीपों को उनके वास्तविक आकार से काफी छोटा और यूरोप व उत्तरी अमेरिका को जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाता है।
अफ्रीका के आकार की विसंगति हुई दूर, भारत की स्थिति पर नहीं पड़ा कोई प्रभाव
पुराने मर्केटर प्रोजेक्शन में तीन-आयामी ग्लोब को दो-आयामी सतह पर दिखाने की तकनीकी चुनौती के कारण उत्तरी गोलार्ध के देश बहुत बड़े नजर आते थे, जिससे अफ्रीका जैसे विशाल महाद्वीप को ग्रीनलैंड के बराबर दिखाया जाता था, जबकि असल में अफ्रीका उससे चौदह गुना बड़ा है। इस नए और सटीक नक्शे के आने से वैश्विक मानचित्र पर महाद्वीपों का सही आनुपातिक आकार सामने आया है। इस बदलाव के बीच भारतीय उपमहाद्वीप और देश की सीमाओं की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है, और नया नक्शा लागू होने के बाद भी भारत अपनी पारंपरिक भौगोलिक स्थिति और आकार में ही नजर आ रहा है।
समुद्री और हवाई नेविगेशन के लिए जारी रहेगा पुराने नक्शे का उपयोग
हालांकि संयुक्त राष्ट्र का यह मतदान कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को पारंपरिक विकृत नक्शों का उपयोग बंद करने के लिए प्रोत्साहित करता है। फ्रांस सहित कई प्रमुख देशों ने इस निष्पक्ष कदम का स्वागत किया है और अपने आधिकारिक प्रकाशनों में इसे अपनाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यद्यपि ‘इक्वल अर्थ’ नक्शा भौगोलिक और महाद्वीपीय आकारों को सही रूप में प्रदर्शित करता है, फिर भी दिशा और कोणों की सटीक गणना के कारण समुद्री जहाजरानी और हवाई नेविगेशन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में पुराने मर्केटर नक्शे का उपयोग आवश्यकतानुसार जारी रहेगा।

