ATS-NIA अधिकारी बनकर रिटायर्ड कर्मचारी को डराया, 30 लाख की ठगी

नयी दिल्ली, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के फतेहाबाद निवासी सुनील सिंगला को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के फतेहाबाद निवासी सुनील सिंगला को गिरफ्तार किया है। बता दें कि आरोपी पर फर्जी पहचान के जरिए लोगों को डराने, आपराधिक धमकी देने और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप लगें हैं। वहीं इस मामले के सामने आने से एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर लोगों को सतर्क रहने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

खुद को ATS, NIA और RBI अधिकारी बताया
इस मामलें के बारे में बताए तो यह ई-एफआईआर नंबर 60001459/2025 (FIR नंबर 47/25) से जुड़ा है जो 9 दिसंबर 2025 को BNS की संबंधित धाराओं के तहत क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारका दिल्ली में रहने वाले भारतीय रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। इसको लेकर पुलिस ने बताया है कि साइबर ठगों ने पीड़ित से संपर्क कर अपनी असली पहचान छिपाई और खुद को ATS, NIA और RBI के अधिकारी के तौर पर पेश किया। इसके बाद उन्हें गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी गई थी।

लाल किला विस्फोट से कनेक्शन का डर दिखाया
बताया जा रहा है कि ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनका हाल ही में दिल्ली के लाल किला इलाके के पास हुए विस्फोट से कथित कनेक्शन है। इसके बाद अलग-अलग आपराधिक मामलों का हवाला देकर गिरफ्तारी का डर पैदा किया गया। वहीं आरोपियों ने WhatsApp वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित से संपर्क बनाए रखा और फर्जी दस्तावेज भेजे। आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर पीड़ित पर दबाव बनाया गया। इसी डर के चलते उन्हें अपने बैंक खाते में मौजूद 30 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

15 लाख रुपये जिस खाते में गए
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने रकम के ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया। जिसके बाद जांच में सामने आया कि 15 लाख रुपये M/s Shri Balaji Tractor के नाम से संचालित बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। वहीं जांच आगे बढ़ी तो इस खाते से सुनील सिंगला का संबंध सामने आया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि उक्त बैंक खाता सिर्फ इस मामले तक सीमित नहीं था। अलग-अलग राज्यों में दर्ज कम से कम 7 अन्य साइबर फ्रॉड मामलों में भी इस खाते का इस्तेमाल सामने आया है।

ऐसे काम करता है Digital Arrest Scam
बता दें कि इस तरह के स्कैम में ठग खुद को सरकारी या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देते हैं। इसके बाद WhatsApp कॉल, फर्जी दस्तावेज, गोपनीयता समझौते, RBI पुष्टि और लीगलाइजेशन बॉन्ड जैसे नकली कागजात भेजकर डर का माहौल बनाया जाता है।

याद रखें: कोई भी असली जांच एजेंसी WhatsApp वीडियो कॉल पर आपको डिजिटल अरेस्ट करके बैंक खाते की रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर नहीं करती है। ऐसी कॉल आए तो घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटें और संबंधित साइबर अपराध प्राधिकरण को शिकायत करें।

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