
इंदौर. बांसुरी के सुरों से लेकर गीता के कर्मयोग तक… कृष्ण का संदेश जितना विराट है, उतनी ही विराट है उसे दुनिया तक पहुंचाने की यात्रा. इंदौर के पद्मभूषण डॉ. आचार्य गोस्वामी गोकुलोत्सवजी महाराज ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और सामवेद की परंपरा को इस यात्रा का माध्यम बनाया. जन्माष्टमी के मौके पर जब देश कृष्ण जन्मोत्सव में डूबा है, तब सात समंदर पार भी सामवेद के सुरों में भारत की आध्यात्मिक गूंज सुनाई दे रही है.
करीब 45 वर्षों से देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय संगीत, दर्शन और अध्यात्म का प्रचार कर रहे गोकुलोत्सवजी महाराज अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अरब देशों में कार्यक्रम कर चुके हैं। अपने सुपुत्र डॉ. गोस्वामी व्रजोत्सवजी महाराज के साथ वे अब तक 173 सोमयज्ञ संपन्न कर चुके हैं. हाल ही में लंदन में आयोजित विराट सोमयज्ञ ने भारतीय संस्कृति की वैश्विक उपस्थिति का एक और प्रभावशाली अध्याय लिखा. यज्ञ की सामग्री भारत से छह शिपिंग कंटेनरों में लंदन पहुंचाई गई. समिधा, यव, तिल, अक्षत, हवन सामग्री, यज्ञपात्र, वस्त्र और वेदी निर्माण की सामग्री के साथ बड़ी मात्रा में घी और अन्य आवश्यक सामग्री भी भारत से भेजी गई. सामवेद संगीत और वैदिक अनुष्ठान के इस संगम ने लंदन में भारतीय परंपरा की अलग पहचान बनाई.
कृष्ण को मंदिर से निकालकर जीवन में उतारने का संदेश
जन्माष्टमी पर गोकुलोत्सवजी महाराज कृष्ण को केवल आराध्य के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन के रूप में देखने का संदेश देते हैं. उनके अनुसार, श्रीकृष्ण केवल भगवान नहीं, तत्व और परम तत्व हैं. महाभारत के प्रसंगों के जरिए वे कृष्ण के उस स्वरूप को सामने रखते हैं, जिसमें धर्म की रक्षा के लिए रणनीति भी है और भक्त के लिए करुणा भी. उनके लिए कृष्ण का जीवन सत्ता या युद्ध की कथा भर नहीं, बल्कि कर्तव्य, नीति, त्याग, लोककल्याण और धर्म की स्थापना का दर्शन है.
सम्मानों की लंबी फेहरिस्त, जीवन में वही सादगी
गोकुलोत्सवजी महाराज को दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार, राष्ट्रीय तानसेन सम्मान, पद्मश्री और पद्मभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं. मधुरपिया उपनाम से 5000 से अधिक गेय पदों की रचना का उल्लेख भी उनके रचनात्मक योगदान को रेखांकित करता है. ध्रूपद-धमार, अष्टपदी, षट्पदी, प्रबंध और संस्कृत तराने जैसी विधाओं में उनका योगदान उल्लेखनीय है. उनके व्यक्तित्व और संगीत साधना पर पुस्तकें लिखी गईं और शोध कार्य हुए, लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद उनकी जीवनशैली सादगी और विनम्रता से जुड़ी रही.
