नयी दिल्ली, 2 अगस्त (वार्ता) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ) ने आयकर विभाग से आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्टों का विवरण मांगा है और अनुरोध किया है कि आयकर अधिनियम के तहत मान्यता देने से पहले प्रतिष्ठान की कवरेज और छूट की स्थिति की संबंधित जांच की जाए।
यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय की बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति में दी गयी है।
मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना 2026 में परिवर्तनकालिक उपाय के रूप में माफी के प्रावधान 29 जून को अधिसूचित किया है। मंत्रालय ने इसके तहत उन भविष्य निधि (पीएफ) ट्रस्टों की छूट स्थिति को नियमित करने के लिए उन्हें एक बार के लिए अवसर दिया है जिन्हें आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के तहत मान्यता प्राप्त है, लेकिन जिन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान (ईपीएफ और एमपी) अधिनियम, 1952 की धारा 17 या सामाजिक सुरक्षा संहिता (सीओएसएस), 2020 की धारा 143 के तहत औपचारिक छूट की अनुमति प्राप्त नहीं की है।
विज्ञप्ति में कहा गया है, ” ईपीएफओ ने आयकर विभाग से आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्टों का विवरण मांगा है और अनुरोध किया है कि आयकर अधिनियम के तहत मान्यता देने से पहले या ईपीएफओ से औपचारिक छूट आदेश प्राप्त न करने वाले पीएफ ट्रस्टों की मौजूदा मान्यता वापस लेने से पहले, या ईपीएफओ से औपचारिक छूट आदेश प्राप्त न करने वाले पीएफ ट्रस्टों की मौजूदा मान्यता वापस लेने से पहले, ईपीएफ और एमपी अधिनियम, 1952 या सीओएसएस, 2020 के तहत प्रतिष्ठान की कवरेज और छूट की स्थिति की संबंधित जांच की जाए।”
सरकार ने माफी योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया, प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं आदि सहित परिचालन दिशानिर्देश 11 जुलाई को जारी विस्तृत परिपत्र में घोषित कर दिए थे। इस माफी योजना के प्रावधान अधिसूचना की तिथि से छह महीने की अवधि के लिए यानी 28 दिसंबर तक वैध हैं। इसमें पिछली तिथि से नियमितीकरण के अलावा, पीएफ ट्रस्टों को मिलने वाले अन्य प्रमुख लाभों में न्यूनतम कर्मचारी संख्या, कोष का आकार और 3-वर्षीय अनुपालन नियम जैसी कुछ आवश्यकताओं से छूट शामिल है।
