मुंबई, 01 सितंबर (वार्ता) पश्चिम एशिया संकट के बीच मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर 4.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0,5 प्रतिशत है।
पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कैड 3.4 अरब डॉलर पर रहा था, जो जीडीपी का 0.4 प्रतिशत था।
भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को अप्रैल-जून 2026 के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इस दौरान वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 86.1 अरब डॉलर हो गया। यह एक साल पहले 68.9 अरब डॉलर था। वहीं, सेवा व्यापार से मिलने वाली शुद्ध आय 47.9 अरब डॉलर से बढ़कर 51.6 अरब डॉलर हो गयी।
पेट्रोलियम, तेल एवं स्नेहकों के व्यापार में तिमाही के दौरान 37.6 अरब डॉलर का घाटा हुआ। यह एक साल पहले 32.2 अरब डॉलर था।
विदेशों से भारतीयों द्वारा देश भेजा गया धन एक साल पहले के 33.2 अरब डॉलर से बढ़कर 42.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसमें सबसे बड़ा योगदान विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे गये मनी ऑर्डर का है।
आलोच्य तिमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में 9.6 अरब डॉलर की गिरावट देखी गयी यानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुद्ध रूप से इतना धन निकाला है। यह आंकड़ा एक साल पहले 1.6 अरब डॉलर था। इस प्रकार यह छह गुना हो गया।
वहीं, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में 6.1 अरब डॉलर देश में आये। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 5.2 अरब डॉलर था।
एनआरआई द्वारा देश में जमा की गयी राशि में कमी आयी है। यह 3.6 अरब डॉलर से घटकर 2.8 अरब डॉलर रह गयी।
विदेशी वाणिज्यिक उधारी 4.4 अरब डॉलर से कम होकर 3.3 अरब डॉलर रही।
इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 8.1 अरब डॉलर कम हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.5 अरब डॉलर बढ़ा था।
