काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद अब भी बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान जारी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास तबाही के बाद राहत और रेस्क्यू टीमों का फोकस उन जलविद्युत परियोजनाओं पर है, जहां बड़ी संख्या में मजदूर और कर्मचारी लापता हैं। करीब 600 लोग अब भी फंसे हो सकते हैं, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सुरंगों में मलबा, पानी और अस्थिर जमीन के कारण बचाव कार्य बेहद जोखिम भरा बना हुआ है। थर्मल ड्रोन, सर्च लाइट और विशेष उपकरणों की मदद से सुरंगों के अंदर जिंदगी के संकेत तलाशे जा रहे हैं। भारत की तकनीकी टीम भी नेपाल के साथ रेस्क्यू अभियान में सहयोग कर रही है।
नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से विशेष तकनीकी मदद मांगी है। इसमें टनल रेस्क्यू टीम, स्कैनर और ड्रोन, डीएनए जांच की सुविधा, शवों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर और आवाजाही बहाल करने के लिए बेली ब्रिज शामिल हैं।
इस बीच नेपाल में मौतों और लापता लोगों की संख्या बढ़कर 987 हो गयी है। राहत के साथ अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को जल्द से जल्द तलाशना और प्रभावित इलाकों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है।
