इंदौर: मुंबई-दिल्ली के व्यस्त रेलमार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार थामकर मिले सिर्फ तीन घंटे. इसी छोटे से समय में रेलकर्मियों ने पुराने ट्रैक को हटाने से लेकर नए रेल पैनल लगाने और उनकी वेल्डिंग तक का काम पूरा कर दिया. रतलाम मंडल ने पश्चिम रेलवे में पहली बार मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन की मदद से यह ट्रैक रिन्यूअल कार्य किया है.
गोधरा-दाहोद रेलखंड के कांसुधी-चंचेलाव के बीच डाउन मेन लाइन पर हुए इस काम के दौरान चार नए रेल पैनल लगाए गए। आठ फ्लैश बट वेल्डिंग, चार एसईजे वेल्ड और दो ग्लूट जॉइंट भी इसी ब्लॉक में तैयार किए गए. काम के दौरान 22 पुराने और खराब वेल्ड हटाए गए। इनमें आठ दोषपूर्ण वेल्ड शामिल थे. दो वेल्ड की जांच में गुणवत्ता संतोषजनक मिली, जबकि संभावित खामी वाले 14 एल्युमिनोथर्मिक वेल्ड बनने से रोक दिए गए.
काम की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौके पर एक साथ 32 कर्मचारियों की मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग टीम और 45 कर्मचारियों की ट्रैक रिन्यूअल टीम काम में जुटी थी. मशीनों के साथ कर्मचारियों के बीच तालमेल और विभागों के समन्वय से तीन घंटे की समय-सीमा में काम पूरा किया गया.
ट्रैक रखरखाव में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
रेलवे के लिए इस कार्य की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि व्यस्त मार्गों पर लंबे समय तक ट्रैफिक ब्लॉक लेना संभव नहीं होता. मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग तकनीक ऐसे ही सीमित समय में मजबूत रेल जोड़ तैयार करने में मदद करती है. टीआरडी, संकेत एवं दूरसंचार और परिचालन विभाग के समन्वय से पूरा हुआ यह काम ट्रैक रखरखाव में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की ओर भी संकेत करता है.
