
सिंगरौली । मोरवा थाना क्षेत्र के ग्राम कतरिहार में शासकीय भूमि का फर्जी पट्टा करने के आरोप में तत्कालीन पटवारी के खिलाफ दर्ज अपराध दर्ज है। जहां पिछले दिनों मोरवा पुलिस के हिरासत से निलंबित पटवारी जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर से फरार हो गया है। आज चौथे दिन भी पटवारी का कोई सुराग नही लगा है। चर्चा है कि इस मामले में मोरवा पुलिस गंभीर नही दिख रही है।
गौरतलब है कि मोरवा थाना क्षेत्र के कतरिहार गांव में शासकीय भूमि का वर्ष 2015 के पूर्व तत्कालीन हल्का पटवारी राजेश नामदेव पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर पूर्व सरपंच के मॉ के नाम 4 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि स्वामी बना दिया था, शिकायत के बाद जांच हुई, आरोप सही पाए जाने पर आरोपी पटवारी के विरूद्ध मोरवा थाने में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। वहीं निलंबित पटवारी को अदालत से राहत मिली थी, लेकिन करीब दो महीने पूर्व पटवारी की जमानत उच्च न्यायालय से खारिज हो गई थी। तब से पटवारी को गिरफ्तार किये जाने की मांग की जा रही थी, परंतु आरोप है कि मोरवा पुलिस आरोपी निलंबित पटवारी को गिरफ्तार करने में हिलाहवाली कर रही थी। एसपी ने एसडीओपी मोरवा को उक्त आरोपी को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी सौपा, 27 अगस्त को एसडीओपी मोरवा की टीम ने गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश करने लाई थी, लेकिन लेटलतीफी के कारण न्यायालय में पेश नही हो सका और इसी दौरान निंलबित पटवारी ने सीने में दर्द होने का बहाना बताया। पुलिस ने तत्काल जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर बैढ़न में लाई और रात भर में अस्पताल में रखी थी 28 अगस्त की अल सुबह पुलिस को चकमा देकर टॉय्लेट रूम से खिड़की तोड़ कर पार हो गया।
एएसआई की भूमिका पर सवाल
इस मामले में एएसपी ने गुलाब प्रसाद बहोरलिया समेत एक आरक्षक को निलंबित कर दिया है। इस पूरे मामले में एएसआई की भूमिका को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े किये जा रहे हैं, वहीं चौथे दिन भी पुलिस अभिरक्षा से फरार निलंबित पटवारी को पुलिस तलाश नही पाई है। इधर इस बात की चर्चा है कि उक्त मामले में मोरवा पुलिस दिलचस्पी भी नही दिखा रही है, इसके पीछे कारण क्या है, निष्पक्ष जांच के बाद ही पता चल पाएगा और असली वजह मोरवा पुलिस ही बता पाएगी। लेकिन फरार पटवारी को चौथे दिन भी गिरफ्तार न कर पाना कहीं न कहीं पुलिस की नाकामी और कमजोरी मानी जा रही है।
