
रीवा, कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने जिले की बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था एवं बाढ़ के साथ राहत राशि को लेकर सोमवार को कलेक्टर से मुलाकात की और राज्यपाल के नाम विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन के माध्यम से जिले में बाढ़ से हुई व्यापक क्षति, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों के निजीकरण तथा रीवा की सडक़ों की खराब स्थिति सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों को उठाया गया.जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष इंजी. राजेन्द्र शर्मा ने कलेक्टर को बताया कि भीषण वर्षा के कारण पूरा रीवा जिला बाढ़ की चपेट में है. रीवा शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में त्योंथर, जवा एवं सिरमौर सर्वाधिक प्रभावित हैं. बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने से गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया है. कई ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकान ध्वस्त हो गए हैं, जबकि कई दिनों तक पानी भरे रहने के कारण फसलें सडक़र नष्ट हो गई हैं तत्काल राहत की आवश्यकता है. श्री शर्मा ने बताया कि रीवा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.
संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद चिकित्सकों एवं आवश्यक स्टाफ की कमी के कारण आम नागरिकों को समुचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. उन्होंने हाल ही में संजय गांधी अस्पताल में नवविवाहिता कल्पना मिश्रा एवं उसके नवजात शिशु की मृत्यु का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सा व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है तो स्वास्थ्य अमले से लेकर उच्च स्तर तक जो भी जिम्मेदार पाए जाएं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. रीवा जिले के आठ अस्पतालों के निजीकरण का भी विरोध जताया गया और निजीकरण प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की गई. साथ ही 200 करोड़ के माडल सडक़ पर सवाल उठाया गया. गुणवत्ता की जांच एवं अनियमितता पाए जाने पर कार्यवाही की मांग की गई. प्रतिनिधि मंडल में महापौर अजय मिश्रा, शहर अध्यक्ष अशोक पटेल, जिला ग्रामीण संगठन महासचिव रवि तिवारी, रमाशंकर सिंह पटेल, बबिता साकेत, लखनलाल खण्डेलवाल, गिरीश सिंह, चक्रधर सिंह, पार्षद धनेन्द्र सिंह बघेल मौजूद रहे.
