
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (वार्ता) स्माइल फाउन्डेशन ने अपने ‘स्किल ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत 21वीं सदी के कौशल प्रोग्राम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है जिसका उद्देश्य टेक्नोलॉजी पर आधारित कार्यस्थल में ज़रूरतमंद युवाओं को आवश्यक कौशल प्रदान करना है। वर्तमान में एआई पर आधारित शिक्षा की यह पहल आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, उड़ीसा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल स्थित एसटीईपी सेंटरों में संचालित की जा रही है, उम्मीद है कि इससे हर साल 15000 से अधिक युवाओं को लाभ होगा।
फाउंडेशन की यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 15 अगस्त को दिये गये स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद इस पहल की शुरूआत की गयी है, जिसमें घोषणा की गयी थी कि अगले साल के दौरान सरकार एक करोड़ युवाओं को एआई में प्रशिक्षण देगी। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग से निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग देने की योजना भी है। ऐसे में ये प्रयास भारत के युवा कार्यबल को एआई के लिए तैयार करने की राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप हैं।
इस प्रोग्राम के तहत एआई को कक्षा में शिक्षण एवं प्रशिक्षक के नेतृत्व में शामिल किया जाएगा। स्माइल फाउन्डेशन ने लर्निंग मैनेजमेन्ट सिस्टम (शिक्षा प्रबन्धन प्रणाली) में एआई-इनेबल्ड टूल्स शामिल करने के लिए अपग्रेड भी किया है, ताकि छात्र एवं अध्यापक प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान इसका उपयोग कर सकें। नये ढांचे के तहत प्रशिक्षकों को एआई प्रशिक्षक मार्गदर्शक की पहुंच मिलेगी, जिसे अवधारणाओं को सरल बनाने, शिक्षण में मार्गदर्शन देने तथा प्रासंगिक उदाहरण सुझाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। छात्र भी शिक्षा में रियल टाइम सहायता पाने के लिए एआई ट्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस प्रोग्राम में एआई करियर एडवाइजर भी शामिल है, जो छात्रों की रूचि के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में सही नौकरी की भूमिकाएं सुझाता है। एआई इंटरव्यू कोच छात्रों को मॉक इंटरव्यू का अभ्यास करने, एआई के ज़रिए फ़ीडबैक पाने का मौका देता है। इससे उनमें संचार कौशल एवं आत्मविश्वास उत्पन्न होता है और वे कार्यस्थल के लिए तैयार हो सकते हैं। स्माइल फाउंडेशन के सह-संस्थापक सांतनु मिश्र ने कहा, ” एआई हमारे सीखने, काम करने और करियर बनाने के तरीके को बदल रहा है। वे युवा जो जल्द कार्यबल में प्रवेश करने वाले हैं, खासतौर पर वंचित समुदायों के युवाओं के लिए इन टूल्स की पहुंच सुनिश्चित करना ज़रूरी है, ताकि उनके लिए ये सुविधाएं डिजिटल-अंतर बनकर न रह जायें। ”
उन्होंने कहा, ” एआई को हमारे 21वीं सदी के कौशल प्रोग्राम में शामिल कर हम छात्रों को एआई का व्यवहारिक अनुभव प्रदान करना चाहते हैं, ताकि वे कार्यस्थल में प्रवेश करने से पहले इस अवधारणा को समझ करें, करियर के बारे में जान सकें, और आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू एवं नौकरी की तैयारी कर सकें।” वित्तीय वर्ष 26 के दौरान स्माइल फाउन्डेशन ने 10,546 युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिसमें से 7380 युवाओं को रोज़गार मिला है। उम्मीदवारों को डेटा मैनेजमेन्ट, इन्वेंटरी मैनेजमेन्ट, बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, सेल्स, रीटेल एवं मार्केटिंग में प्रविष्टि स्तर के अवसर मिले हैं। फाउन्डेशन ने कहा कि एआई टूल्स अब सिर्फ स्टैंडअलोन टेक्नोलॉजी मॉड्यूल नहीं रहे, अब इन्हें पारम्परिक कम्युनिकेशन, रोज़गार क्षमता एवं कार्यस्थल के कौशल में शामिल किया जा रहा हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को कार्यबल में प्रवेश करने से पहले ही एआई से परिचित कराना है, ताकि वे लर्निंग, करियर के बारे में जानकारी, इंटरव्यू एवं कार्यस्थल की तैयारी के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सकें।
