श्री जागेश्वर धाम बांदकपुर में संस्कृत सप्ताह का भव्य समापन समारोह

बांदकपुर/दमोह। श्री जागेश्वर धाम स्थित उच्च माध्यमिक संस्कृत वेदांग विद्यालय, श्री देव जागेश्वर नाथ जी मंदिर बांदकपुर में विगत एक सप्ताह से आयोजित संस्कृत सप्ताह का समापन समारोह अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह व गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आयोजित इस सप्ताहव्यापी कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय में विशेष सभा आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों ने संस्कृत भाषा की महत्ता, भारतीय संस्कृति में उसके योगदान तथा वर्तमान समय में संस्कृत के अध्ययन व अध्यापन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए

मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल पाठक शास्त्री जी महाराज ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक परंपरा की आधारशिला है हमारे वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद, ज्योतिष व अनेक प्राचीन ग्रंथ संस्कृत भाषा में ही रचित हैं संस्कृत के माध्यम से ही भारतीय संस्कृति की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा आज भी सुरक्षित है इसलिए संस्कृत भाषा का संरक्षण करना वास्तव में अपनी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करना है इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री कुन्जीलाल डिम्हा ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा देवभाषा है, सरल भाषा है और मधुर भाषा है संस्कृत हमारी सनातन संस्कृति की आत्मा है तथा इसमें ज्ञान और विज्ञान का अपार भंडार समाहित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को पढ़ने और पढ़ाने वाले शिक्षक एवं विद्यार्थी देश की संस्कृति के सच्चे एवं सजग प्रहरी हैं उनका दायित्व केवल भाषा का अध्ययन एवं अध्यापन करना ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और ज्ञान की महान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना भी है

प्राचार्य श्री डिम्हा ने कहा कि आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी संस्कृत भाषा के प्रति रुचि जागृत करे और अपने प्राचीन ग्रंथों तथा सांस्कृतिक मूल्यों को समझे। संस्कृत भाषा जितनी प्राचीन है, उतनी ही वैज्ञानिक, व्यवस्थित व समृद्ध भी है इसके शुद्ध उच्चारण, व्याकरणिक संरचना और मधुरता ने इसे विश्व की विशिष्ट भाषाओं में सम्मानजनक स्थान प्रदान किया है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत के अध्ययन के माध्यम से वे अपने व्यक्तित्व का निर्माण करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं

संस्कृत सप्ताह के दौरान विद्यालय परिवार द्वारा संस्कृत भाषा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर शिक्षकों व विद्यार्थियों ने संस्कृत के गौरव और उसके व्यापक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि संस्कृत केवल विद्यालयों और धार्मिक ग्रंथों तक सीमित भाषा नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन दर्शन और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत धरोहर है समापन समारोह के अंत में संस्थान के प्रवक्ता आचार्य पंडित रवि शास्त्री जी महाराज ने संस्कृत सप्ताह के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों व प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा जब तक हमारी नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहेगी, तब तक भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा सदैव जीवंत और सुरक्षित रहेगी।

समापन समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, अध्ययन-अध्यापन तथा भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। संस्कृत सप्ताह का यह भव्य आयोजन नई पीढ़ी में संस्कृत के प्रति प्रेम, सम्मान और जागरूकता उत्पन्न करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण व प्रेरणादायक प्रयास सिद्ध हुआ।

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