
बालाघाट, जिला पंचायत बालाघाट के अध्यक्ष ने तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आईएएस अभिषेक सराफ के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए पंचायती राज व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने और व्यापक भ्रष्टाचार का दावा किया है। उन्होंने सीईओ को हटाए जाने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री का आभार व्यक्त किया।असंवैधानिक कार्यों के चलते जिला पंचायत सीईओ हटाए गए
सर्किट हाउस बालाघाट में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सम्राट अशोक सरसवार की द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई जिसमें अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला पंचायत के सभी सदस्यों के द्वारा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक श्राफ का गलत कार्य लगातार विरोध किया गया । इन्हें जिले से हटाने मुख्यमंत्री ओर प्रमाणी मंत्री को ज्ञापन देकर विरोध प्रदर्शन भोपाल जाकर किया गया था । इन सब विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री के द्वार मुख्य कार्यपालन अधिकारी को बालाघाट के जिला पंचायत से हटाते हुए अन्यत्र जिले में स्थानांतर कर दिया गया । इसके लिए हम सभी अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के द्वारा मुख्यमंत्री ओर प्रभारीमंत्री की धन्यवाद ज्ञापित किया है ।
जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट ने आगे कहा कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा लगातार आसंविधानिक संविधानिक तरीके से जिला पंचायत में कार्य किया जिसके लिये जिसके लिए उन्हें हटाया गया है ।
अध्यक्ष ने सीईओ पर
प्रमुख आरोप लगते हुए अनेक बिंदु दिए है जिसमें प्रमुख है
अध्यक्ष व त्रिस्तरीय व्यवस्था की अनदेखी:
अध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्रों एवं कारण बताओ नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। गौण खनिज की बैठकों से जिला पंचायत अध्यक्ष को जानबूझकर दूर रखा गया और भ्रामक जानकारी दी गई।
सरपंचों व कर्मचारियों का उत्पीड़न:
कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों को धारा 40 के नोटिस व पेशियों के नाम पर परेशान किया गया। आरईएस (RES) और मनरेगा के उपयंत्रियों के क्लस्टर प्रभार में बिना अध्यक्ष के अनुमोदन के मनमाने तरीके से बदलाव किए गए।
वित्तीय अनियमितताएं:
नल-जल संधारण एवं अन्य कार्यों के लिए सामान्य प्रशासन समिति व अध्यक्ष के संज्ञान के बिना करोड़ों रुपये की स्वीकृति व आहरण किया गया। एक-एक पंचायत में नियमों को दरकिनार कर कई-कई कार्य स्वीकृत किए गए।
नियम विरुद्ध पदस्थापना:
शिक्षा विभाग से शिक्षकों को नियम विरुद्ध जिला पंचायत में अटैच किया गया, जबकि मूल कर्मचारियों को अन्य विभागों में भेजा गया।
कागजी पुरस्कारों पर सवाल:
जिले को जल संवर्धन व अन्य क्षेत्रों में मिले पुरस्कारों को कागजी बताते हुए जमीनी हकीकत की जांच कराने की बात कही गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सीईओ के स्थानांतरण के बाद भी उनके कार्यकाल के दौरान हुई तमाम वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की बिंदुवार जांच कराई जाएगी और दोषियों को सामने लाया जाएगा।
