इंदौर: राजस्थान के प्रतिष्ठित संगीत घराने की चौथी पीढ़ी के गायक और सुप्रसिद्ध जयपुरी ब्रदर्स रविवार को इंदौर पहुंचे. अभिनव कला समाज में हुई मुलाकात के दौरान सूफी फ्यूजन म्यूजिक बैंड के संस्थापक शाहरुख जयपुरी और वसीम जयपुरी ने बदलते संगीत के दौर, इंटरनेट के प्रभाव और युवा पीढ़ी की संगीत पसंद को लेकर अपने विचार साझा किए.
जयपुरी ब्रदर्स का मानना है कि इंटरनेट की दुनिया का असर संगीत जगत पर भी पड़ा है. संगीत सुनने और उसे प्रस्तुत करने का अंदाज तेजी से बदल रहा है. उन्होंने कहा कि आज युवा पीढ़ी पुराने गीतों को नए अंदाज और नए संगीत संयोजन के साथ सुनना पसंद कर रही है. ऐसे में पुराने लोकप्रिय गीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत करना कलाकारों के लिए समय की जरूरत बन गया है. उन्होंने कहा कि पुराने दौर में संगीत के रसिक श्रोता बैठकर एकाग्रता से संगीत सुना करते थे. उस समय गायन और वादन की लंबी प्रस्तुतियों का आनंद लिया जाता था. अब समय बदल गया है. आज लाइव कॉन्सर्ट में हजारों श्रोता खड़े होकर संगीत का आनंद लेते हैं और गीतों की धुन पर झूमते-नाचते हैं. संगीत अब केवल सुनने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाइव प्रस्तुति के दौरान दर्शकों की भागीदारी भी बढ़ी है.
इंटरनेट ने संगीत को फास्ट ट्रैक पर पहुंचाया
शाहरुख और वसीम ने कहा कि इंटरनेट ने म्यूजिक की दुनिया को फास्ट ट्रैक पर ला दिया है. नई पीढ़ी कई बार पूरा गीत सुनने के बजाय महज एक मिनट में ही यह तय कर लेती है कि उसे गीत पसंद आया या नहीं. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने कलाकारों और श्रोताओं के बीच की दूरी भी कम कर दी है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आज श्रोताओं ने अपनी पसंद के मुताबिक संगीत की अलग-अलग कैटेगरी चुन ली हैं. कोई शास्त्रीय संगीत सुनना पसंद करता है तो कोई सूफी संगीत का प्रशंसक है. इसके बावजूद जहां अच्छा संगीत प्रस्तुत किया जाता है, वहां श्रोता जरूर पहुंचते हैं. संगीत की गुणवत्ता आज भी लोगों को जोड़ने में सक्षम है.
संगीत की विरासत चौथी पीढ़ी तक कायम
जयपुरी ब्रदर्स ने बताया कि उनके कई गीत लोकप्रिय हुए हैं और उनका सूफी फ्यूजन म्यूजिक बैंड देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है. अपने संगीत घराने की परंपरा का उल्लेख करते हुए दोनों भाइयों ने बताया कि उनके परिवार का संगीत से पुराना रिश्ता रहा है. उस्ताद सिकंदर खां साहब राजगायक रहे हैं और जयपुर में उनका चित्र भी सुशोभित है. उनके दादा भी जाने-माने तबला वादक रहे हैं. परिवार की इस संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए उनकी बरसी पर हर वर्ष गायन कार्यक्रम आयोजित किया जाता है.
