अगस्त (वार्ता) ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने शनिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उथल-पुथल पैदा करने से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच समस्याओं का समाधान संवाद और जून में हुए समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन के जरिए किया जा सकता है।
मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान में एक समारोह में श्री पेजेशकियान ने कहा, “यदि हम संवाद और समझौता ज्ञापन के आधार पर आगे बढ़ते हैं, तो हम समस्याओं का समाधान कर अपने अधिकार सुनिश्चित कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि यह ईरान, क्षेत्र और पूरी दुनिया के हित में है कि ट्रंप उथल-पुथल पैदा न करें और इजरायल असुरक्षा तथा आक्रामकता का कारण न बने।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, “हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हम आक्रामकता के खिलाफ मजबूती से खड़े होंगे और अपनी रक्षा करेंगे।”
श्री पेजेशकियान ने कहा कि अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए एकजुट और दृढ़ संकल्पित राष्ट्र को कोई भी शक्ति आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि तेहरान संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करना चाहता है, लेकिन ईरानी जनता, अधिकारी और सैन्य कमांडर धमकियों तथा आक्रामकता के सामने “कभी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।” उन्होंने इजरायल पर मुस्लिम देशों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्लामी देशों के बीच अधिक एकजुटता ऐसी कोशिशों को विफल कर सकती है।
घरेलू मामलों का जिक्र करते हुए श्री पेजेशकियान ने कहा कि आगामी सर्दियों में औद्योगिक उत्पादन को जारी रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने कहा कि उत्पादन इकाइयों को गैस, बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार पानी, बिजली, गैस और ईंधन की खपत का प्रबंधन करेगी। यदि किसी तरह के प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पड़ती है तो उसका बोझ पहले सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों पर डाला जाएगा, न कि आम जनता पर।
श्री पेजेशकियान ने लोगों से स्थिरता बनाए रखने में सरकार के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईरान के विरोधियों को यह नहीं समझना चाहिए कि दबाव के जरिए देश को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जा सकता है।
ईरान के अनुसार, अमेरिका-इजरायल का उसके खिलाफ युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब देशभर में सैन्य, परमाणु और बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किये।
ईरान और अमेरिका के बीच जून में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन हुआ था। इसका उद्देश्य शत्रुता समाप्त करना और व्यापक समझौते के लिए बातचीत हेतु 60 दिनों का अवसर उपलब्ध कराना था।
समझौता ज्ञापन में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंधों में राहत और ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करने जैसे मुद्दे भी शामिल थे।
तेहरान का कहना है कि वार्ता में आगे बढ़ने के लिए वाशिंगटन को समझौता ज्ञापन के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इन प्रतिबद्धताओं के लागू होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला जाएगा।
