
इसमें कंटेंट बनाने के लगभग हर चरण को एक जगह जोड़ा गया है। इसमें आइडिया, स्क्रिप्ट, स्टोरीबोर्ड, कास्टिंग, लोकेशन, कॉस्ट्यूम, अलग-अलग एंगल के शॉट्स, म्यूजिक, डायलॉग, एडिटिंग, कैप्शन, वीडियो रेंडरिंग, विज्ञापन फॉर्मेट और वितरण तक शामिल हैं। खास बात यह है कि स्पार्कस्टेशन किसी एक एआई मॉडल पर निर्भर नहीं है। अलग-अलग काम के लिए यह उस एआई मॉडल को चुनता है, जो उस काम के लिए सबसे बेहतर हो। उन्होंने बताया कि आज से इसका बीट वर्जन उपलब्ध हो गया है। पूरी दुनिया के लिए वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए यह 01 अक्टूबर से उपलब्ध होगा। इसका एंटरप्राइज एपीआई 01 नवंबर को पेश किया जायेगा। हालांकि पिछले कुछ समय में विज्ञापन बनाने में इसका सफल इस्तेमाल किया गया है।
इसकी मदद से फिल्म, लघु फिल्म, वृत्त चित्र या विज्ञापन का निर्माण किया जा सकता है। इसके लिए एक-एक टूल का जितना इस्तेमाल किया जायेगा यूजर को उतना ही भुगतान करना होगा। यूजर चाहे तो कहानी, चित्र, आवाज, चरित्र जैसे अपने इनपुट भी दे सकता है। कंपनी का दावा है कि पारंपरिक तरीके से जिस फिल्म को बनाने में 10-25 लाख रुपये की लागत आती है, वही फिल्म स्पार्कस्टेशन की मदद से 50-75 हजार रुपये में बनाई जा सकती है। यहां 60 सेकंड की ब्रांड फिल्म की लागत 90 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इतना ही नहीं, कई सप्ताह में पूरा होने वाला प्रोडक्शन करीब 24 घंटे में पूरा किया जा सकता है।
स्पार्कस्टेशन को तीन तरह के ग्राहकों के लिए तैयार किया गया है। फिल्ममेकर्स और प्रोडक्शन हाउस; ब्रांड्स, बिजनेस, ई-कॉमर्स तथा एजेंसियां; और क्रिएटर्स तथा इन्फ्लुएंसर्स। कंपनी के मुताबिक, प्रोडक्शन का हर चरण एक ही पाइपलाइन में होता है। इससे पूरी फिल्म में कंटेंट एक जैसा होता है और उसमें निरंतरता बनी रहती है। चेहरे से लेकर कपड़ों तक सब कुछ एक जैसा रहेगा। यह 60 से ज्यादा भाषाओं में कंटेंट तैयार कर सकता है जिसमें विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं। भाषा बदलने के साथ होंठों की मूवमेंट, भावनाएं और स्थानीय बोलचाल को भी ध्यान में रखा जाता है।
इसमें किसी एक सॉफ्टवेयर से बंधे रहने की जरूरत नहीं है। कंटेंट को प्रीमियर, फाइनल कट और दाविन्सी रिजॉल्व जैसे एडिटिंग सॉफ्टवेयर में एक्सपोर्ट किया जा सकता है। श्री बेदी ने कहा कि कई बार प्रोडक्शन की ज्यादा लागत के कारण कई कहानियां कभी स्क्रीन तक नहीं पहुंच पातीं। स्पार्कस्टेशन का मकसद सिर्फ कंटेंट बनाने की लागत कम करना नहीं है, बल्कि ऐसी कहानियों को भी संभव बनाना है, जो पहले बजट की वजह से नहीं बन पाती थीं। कंपनी ने अगले दो साल के लिए प्लेटफॉर्म में तीन करोड़ डॉलर से ज्यादा निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह पैसा जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई सिस्टम और विशेषज्ञों पर खर्च किया जायेगा। कंपनी का लक्ष्य दुनियाभर में 100 से अधिक स्टूडियो, एक हजार से ज्यादा ब्रांड और हजारों क्रिएटर्स को स्पार्कस्टेशन से जोड़ना है।
