हैदराबाद, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला समाधान पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के हालिया फैसले की कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने कहा कि बैंकों के ₹22,006 करोड़ के बकाए के बदले मात्र ₹6.5 करोड़ के भुगतान को मंजूरी देना बड़े कॉरपोरेट घरानों के प्रति खुला वर्ग पक्षपात है।
आम नागरिकों और कॉरपोरेट में दोहरे मापदंड
वामपंथी पार्टी ने आरोप लगाया कि देश में अमीर उद्योगपतियों और आम नागरिकों के लिए अलग-अलग कानून चल रहे हैं। जहां छोटे किसानों और मजदूरों को मामूली कर्ज न चुकाने पर उत्पीड़न झेलना पड़ता है, वहीं रसूखदार लोगों को हजारों करोड़ के कर्ज में भारी छूट मिल जाती है।
टैक्सपेयर्स के पैसों की सुरक्षा की मांग
पार्टी ने आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बड़े कॉरपोरेट्स से लोन रिकवरी बेहद कम है। CPI(M) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस फैसले को पलटा जाए ताकि आम जनता और टैक्सपेयर्स के हितों की रक्षा हो सके।

