तिरुवनंतपुरम, 29 अगस्त (वार्ता) केरल में पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित ओणम सप्ताह के दौरान तिरुवनंतपुरम के कनककुन्नु महल में प्रसिद्ध कलाकार मार्गी उषा की ‘नंग्यारकूथु’ प्रस्तुति को देखने के लिए विदेशी पर्यटकों सहित भारी भीड़ उमड़ पड़ी जिससे प्रदेश की पारंपरिक कला जीवंत हो उठी।
औपनिवेशिक काल के इस महल में कुडियाट्टम, कथकली, नंग्यारकूथु, चाक्यारकूथु और अक्षराश्लोक सदस की शानदार प्रस्तुतियां हुईं जिन्होंने रविवार से शुरू हुए सप्ताह भर चलने वाले उत्सव में रंग और सांस्कृतिक जीवंतता भर दी।
महल में हर दिन शाम चार बजे पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो कला-प्रेमी दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। शुक्रवार को मार्गी उषा ने ‘वामनावतारम’ की अपनी प्रस्तुति से खचाखच भरे हॉल में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लगभग छह दशक तक प्रदर्शन कला को समर्पित करने वाली उषा ने भारत और विदेशों में कई जगहों पर कुडियाट्टम का प्रदर्शन किया है और इस पारंपरिक कला में अपने योगदान के लिए कई सम्मान हासिल किए हैं। वह वर्तमान में तिरुवनंतपुरम के कुडियाट्टम-नंग्यारकूथु स्कूल में सिखाती हैं।
प्रदेश के पर्यटन, सिनेमा और संस्कृति मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केरल की पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देना है, जिसमें कुडियाट्टम भी शामिल है, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर की एक अनुष्ठानिक कला के रूप में मान्यता दी है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इन पारंपरिक कलाओं से परिचित कराना महत्वपूर्ण है और ओणम समारोह इसके लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है।
मंत्री ने कहा, “सरकार केरल की अनुष्ठानिक कलाओं के लिए और अधिक मंच उपलब्ध कराने और इस कठिन कला में लंबे समय तक समर्पित रहने वाले कलाकारों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
मार्गी उषा ने कुडियाट्टम को केरल की कलाओं का मूल स्रोत बताया और इस पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “महल के अंदर इन प्रस्तुतियों के लिए मंच देना-जो पारंपरिक रूप से केवल ‘कूथंबलम’ में ही होती थीं-इस कला-रूप को एक सम्मान है।”
