भैरुंदा। मां नर्मदा के तट हंसेश्वरी महादेव मंडी घाट पर विप्र देवताओं द्वारा सामूहिक रूप से श्रावणी उपाकर्म किया गया. श्रावणी उपाकर्म के तीन पक्ष हैं. प्रायश्चित्त संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय. वर्तमान में श्रावणी पूर्णिमा के दिन ही उपाकर्म और उत्सर्ग दोनों विधान कर दिए जाते हैं. यह जीवन शोधन की एक अति महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक आध्यात्मिक प्रक्रिया है. उसे पूरी गम्भीरता के साथ किया जाना चाहिए. श्रावणी पर्व वैदिक काल से शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का पुण्य पर्व माना जाता है. श्री सिद्धिदात्री ज्योतिष अनुष्ठान केंद्र के आचार्य पंडित संजय शर्मा द्वारा उपाक्रम संपन्न कराया गया. मुख्य रूप से इस आयोजन में पं. आयुष्मान तिवारी पंडित गोपाल जैमिनी पं. घनश्याम शर्मा, कमलेश शर्मा, सुमित दुबे, योगेश, संतोष तिवारी, अभिषेक जोशी, कुलदीप व्यास, संतोष तिवारी, संतोष पाठक, दिनेश भार्गव एवं राज ठाकुर ने श्रावणी उपाकर्म किया.
