ओस्लो, 28 अगस्त (वार्ता) यूरोप के सबसे उम्रदराज सम्राट और नार्वे के राजा हेराल्ड पंचम का शुक्रवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो हाने के बाद युवराज हाकोन जब नये सम्राट के रूप में पद संभालेंगे, तो उनका आधिकारिक शाही नाम ‘राजा हाकोन अष्ठम’ होगा। नार्वे के इतिहास में इस नाम के वे आठवें राजा होंगे। उनके दादा ‘हाकोन सप्तम’ थे।
नार्वे के संवैधानिक राजतंत्र के नियमों के अनुसार, राजा के निधन होते ही सिंहासन खाली नहीं रहता। बिना किसी चुनाव या लंबी औपचारिक प्रक्रिया के, उत्तराधिकार के नियम के तहत उनके बड़े बेटे युवराज तुरंत नये राजा बन जाते हैं।
नार्वे के रॉयल कोर्ट के अनुसार, उन्होंने ओस्लो के नेशनल अस्पताल में सुबह 6:35 बजे अंतिम सांस ली। किंग हेराल्ड लगभग 35 वर्षों तक सम्राट रहे। इस लंबे दौर में उन्होंने देश को आधुनिक बनाने और एकजुट रखने में बड़ी भूमिका निभायी।
राजा हेराल्ड का जन्म 1937 में हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब नाजी जर्मनी ने नार्वे पर कब्जा कर लिया था, तब उन्हें बचपन में अपनी मां और बहनों के साथ अमेरिका में निर्वासित जीवन बिताना पड़ा था।
युद्ध समाप्त होने के बाद जून 1945 में उनका परिवार स्वदेश लौटा। उन्होंने जन सामान्य के स्कूलों, नार्वेजियन मिलिट्री कॉलेज और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की।
अपने पिता की तरह उन्हें भी समुद्र और नौकायन से बेहद लगाव था और उन्होंने कई ओलंपिक खेलों में नार्वे का प्रतिनिधित्व किया था।
उन्होंने शाही परंपराओं और अपेक्षाओं से इतर जाकर वर्ष 1968 में अपनी बचपन की मित्र सोन्या हेराल्डसेन से विवाह किया था। शुरुआत में इस विवाह को लेकर राजघराने में हिचकिचाहट थी, लेकिन बाद में जनता ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।
21 जनवरी 1991 को अपने पिता राजा ओलाव पंचम के निधन के बाद वह नार्वे के सम्राट बने। अपने तीन दशक से अधिक के शासनकाल के दौरान उन्होंने राजघराने को आधुनिक बनाया। 2011 में उग्रवादी हमलों (जिसमें 77 लोग मारे गए थे) के बाद उन्होंने देश में खुलेपन, लोकतंत्र और स्वतंत्रता का निडरता से बचाव किया।
इसके अलावा, 2016 में विविधता, एलजीबीटीक्यू समानता, शरणार्थियों और धार्मिक सहिष्णुता पर दिये गये उनके भाषण ने उन्हें जनता के बीच एक आधुनिक और समावेशी सम्राट के रूप में स्थापित किया।
हाल के वर्षों में कई यूरोपीय सम्राटों के गद्दी छोड़ने के चलन के बावजूद किंग हेराल्ड ने अपने संकल्प ‘यह जीवन भर के लिए है’ का पालन किया और जीवन के अंतिम समय तक पद पर बने रहे।
पिछले कुछ वर्षों से वे लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा राष्ट्र शोक में है और नार्वे की सेवा में दिये गये उनके लंबे जीवन के लिए देशवासी उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हैं।
राजा हेराल्ड पंचम के निधन के बाद ‘हाकोन अष्ठम’ को मिली नार्वे की राजगद्दी
