कागजों में गरीब पेट भर, हकीकत में खाली थाली

सीहोर/ इछावर। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले सरकारी राशन की वितरण व्यवस्था पर इछावर तहसील में एक के बाद एक गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. झरखेड़ा में ग्रामीणों ने छह महीने से राशन नहीं मिलने और बायोमेट्रिक के जरिए कथित तौर पर राशन निकाल लिए जाने के आरोप लगाए हैं. वहीं दौलतपुर में 236 पात्र परिवारों में से 136 गरीब एवं आदिवासी परिवारों को तीन महीने से राशन नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है.दूसरी ओर बरखेड़ा कुर्मी की उचित मूल्य दुकान पर राशन की जगह हितग्राहियों को कथित रूप से नगद राशि बांटे जाने का मामला भी सामने आया है. लगातार सामने आ रही शिकायतों ने इछावर की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है.

ग्राम झरखेड़ा के ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर विंध्याचल स्व सहायता समूह ललियाखेड़ी द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान के खिलाफ शिकायत की है. ग्रामीणों का आरोप है कि करीब छह महीने से उन्हें खाद्यान्न का वितरण नहीं किया जा रहा है. उनका यह भी आरोप है कि अनपढ़ एवं गरीब उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर बायोमेट्रिक मशीन पर जबरन अंगूठा लगवाया जाता है और पात्रता पर्ची से कथित तौर पर राशन निकाल लिया जाता है. ग्रामीणों के अनुसार जब वे दुकान पर राशन लेने पहुंचते हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. दुकान समय पर नहीं खुलने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है। उनका कहना है कि राशन नहीं मिलने से भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है.

इधर दौलतपुर के ग्रामीणों का कहना है कि लगातार तीन महीने से राशन नहीं मिलने के कारण गरीब परिवार परेशान हैं. त्योहार के समय भी जब अनाज की जरूरत थी, तब पात्र परिवारों को अपने हक के खाद्यान्न से वंचित रहना पड़ा. ग्रामीणों ने प्रशासन से राशन दिलाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है.

एक ही तहसील क्षेत्र में राशन वितरण से जुड़ी तीन शिकायतों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि इन मामलों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी. प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाने की है कि रिकॉर्ड में दर्ज राशन वास्तव में हितग्राहियों तक पहुंचा या कागजों में ही वितरित होकर रह गया. ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई हो तथा पात्र परिवारों को बकाया राशन तत्काल उपलब्ध कराया जाए. साथ ही झरखेड़ा में नियमित रूप से दुकान खुलवाने अथवा वैकल्पिक उचित मूल्य दुकान से राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है.

राशन की जगह बांटे रुपए, अब जांच में खुलेगा राज

बरखेड़ा कुर्मी की उचित मूल्य दुकान पर भी वितरण व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है. आरोप है कि हितग्राहियों को राशन देने के बजाय कथित तौर पर नगद राशि वितरित की गई. दुकान बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति आमला रामजीपुरा से जुड़ी बताई जा रही है. मामला एसडीएम स्वाती मिश्रा के संज्ञान में आने के बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं. अब स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन का रिकॉर्ड और हितग्राहियों के बयान से यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में राशन का वितरण हुआ था या नियमों के विपरीत नगद राशि बांटी गई.

चार उचित मूल्य दुकानों पर प्रकरण दर्ज

बुधनी. एसडीएम संजीव नागू के निर्देश पर बुधनी विकासखंड की ग्राम पंचायत खैरी सिलगेना, नांनमेट, रतनपुर, खिडिय़ाकुर्मी एवं चिकल्ली में राशन वितरण में अनियमितता संबंधी शिकायत मिलने पर सहायक आपूर्ति अधिकारी श्रीमती पिंकी शाक्य द्वारा जांच की गई. दुकानों पर मौजूद हितग्राहियों ने राशन वितरण में गंभीर अनियमितताओं, दुकान समय पर नहीं खुलने तथा पीओएस मशीन में बायोमेट्रिक लगाने के बावजूद राशन सामग्री उपलब्ध नहीं कराने जैसी शिकायतें दर्ज कराई.खाद्यान्न स्टॉक में भी अंतर पाया गया. अधिकारी द्वारा उचित मूल्य दुकान खेरी सिलगेना, नांनमेट, रतनपुर, खिडिय़ाकुर्मी एवं चिकल्ली के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया. संबंधित समिति प्रबंधक, समूह अध्यक्ष एवं दुकान विक्रेताओं द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली कंडिकाओं का उल्लंघन किए जाने पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं. एसडीएम ने कहा कि राशन वितरण को लेकर अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.

दौलतपुर में 136 परिवारों का राशन आखिर कहां गया

दौलतपुर ग्राम पंचायत में भी राशन वितरण को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है. ग्रामीणों और ग्राम पंचायत द्वारा एसडीएम को दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार गांव में 236 बीपीएल पात्र परिवार हैं, लेकिन पिछले तीन महीनों से इनमें से 136 गरीब एवं आदिवासी परिवारों को राशन नहीं मिला. ग्रामीणों का आरोप है कि पूछने पर सेल्समैन द्वारा शासन से राशन नहीं आने की बात कही जाती रही.शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रिकॉर्ड में सभी 236 परिवारों को राशन वितरित किया जाना दर्शाया गया है. यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी राशन के रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच गंभीर गड़बड़ी का मामला हो सकता है.

 

 

 

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